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किसान आंदोलन से साढ़े तीन महीने में जूता उद्योग को चार हजार करोड़ का फटका

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बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के चलते बहादुरगढ़ के तीन हजार से ज्यादा उद्योग धंधे प्रभावित हो रहे हैं। इसी कारण बहादुरगढ़ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के लोग खुद ही किसानों से बात करके सड़क का एक हिस्सा खुलवा रहे हैं लेकिन हजारों फैक्टरियाें के मालिक सरकार और प्रशासन के रुख से नाराज हैं।
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बहादुरगढ़ में जूते और चप्पल बनाने की एक हजार से ज्यादा फैक्टरियां हैं लेकिन पहले कोरोना और अब दिल्ली-हरियाणा के बंद बॉर्डर से व्यवसाय पर असर पड़ा है। उद्यमियों ने सरकार से मांग की है कि या तो बातचीत से हल निकाला जाए या दिल्ली आने-जाने के लिए टीकरी बॉर्डर का भी एक तरफ का हिस्सा खुलवाया जाए। साढ़े तीन महीने से चल रहे किसान आंदोलन की वजह से बहादुरगढ़ के उद्योगों को करोड़ों का नुकसान हो चुका है। फैक्टरियाें में काम भी 50 फीसदी ही रह गया है।
जूता फैक्टरी बहादुरगढ़ के मालिक सचिन गुप्ता का कहना है कि लेबर और कच्चा माल ही नहीं आ पा रहा है। खुद हम लोगों को आने जाने में दिक्कत है। जूता उद्योग को अब तक चार हजार करोड़ की चपत लग चुकी है। बहादुरगढ़ के आसपास करीब तीन हजार से ज्यादा उद्योग हैं। किसान आंदोलन के चलते बहादुरगढ़, कुंडली और मानेसर की फैक्टरियाें पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
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कोई हल न निकलने से नाराज हैं उद्यमी : राजेश चुघ
बहादुरगढ़ में केमिकल फैक्टरी चलाने वाले राजेश चुघ को आंदोलन के शुरुआती दिनों में लगा था कि दस पंद्रह दिन में आंदोलन खत्म हो जाएगा, लेकिन अब तीन महीने से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है और कोई हल न निकलने से वो खासे नाराज हैं। चुघ ने सवाल किया कि क्या सारे अधिकार दिल्ली वालों के ही हैं, जब किसान दिल्ली जाना चाहते हैं तो उन्हें क्यों यहां रोका गया है। बहादुरगढ़ की जनता के कोई अधिकार नहीं हैं। सरकार को एक उचित समय के बाद किसानों को वापस भेजना चाहिए। बहादुरगढ़ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन को जब सरकार और प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली तो इन लोगों ने खुद ही किसानों से बात करके सड़क का एक हिस्सा खुलवा लिया है। इनकी कोशिश यही है कि रात के वक्त ज्यादा माल ढुलाई हो, लेकिन दिल्ली जाने वाले रास्ते को दिल्ली पुलिस ने बंद कर रखा है।
दिल्ली पुलिस ने दिया है केवल आश्वासन : प्रवीण
बहादुरगढ़ चैंबर ऑफर कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के सदस्य प्रवीण गर्ग का कहना है कि वे दिल्ली पुलिस से बातचीत कर चुके हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिला है। झाड़ोदा बॉर्डर तो पिछले दिनों खोल दिया गया, लेकिन टीकरी बॉर्डर अब भी पूरी तरह से सील है। जब तक यह बॉर्डर नहीं खुलेगा, उद्यमियों की समस्या का समाधान होने वाला नहीं है क्योंकि एमआइई पार्ट-ए और बी से सामान की ढुलाई इसी बॉर्डर से होती रही है।
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