किसानों द्वारा टीकरी बॉर्डर पड़ाव में बनाई गई ईंटों से झोपड़ी।
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। कृषि कानून विरोधी आंदोलन को टीकरी बॉर्डर पर 106 दिन बीत चुके हैं। कड़ाके की ठंड के बाद यहां बैठे आंदोलनकारियों को गर्मी सताने लगी है। इसे देखते हुए आंदोलनकारियों ने धरनास्थल पर पक्के निर्माण शुरू कर दिए हैं। किसानों ने डिजाइनदार झोपड़ियां बनानी शुरू कर दी हैं। यह सुंदर लगने के साथ किसानों का गर्मी और धूप से भी बचाव करेंगी।
टीकरी बॉर्डर पर बहादुरगढ़ बाईपास को जाम करके धरना दे रहे आंदोलनकारियों ने गर्मी से बचने के तरह-तरह उपाय शुरू कर दिए हैं। कहीं ऐसी ट्रॉली तो कहीं तंबू में एसी के अलावा अब रोड पर भी पक्का निर्माण शुरू कर दिया है। टीकरी बॉर्डर से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर ईंट और सीमेंट के कमरों के साथ-साथ डिजाइनदार झोपड़ियां बनानी शुरू कर दी है। यह हवादार होने के कारण किसानों को धूप और गर्मी से बचाएंगी। इनके ऊपर पराली से छत बनाई जा रही है, ताकि अंदर ठंडक रहे। इनका निर्माण करने वालों गांव जसिया निवासी राजबीर, धनाना निवासी मनदीप, मकड़ौली निवासी जबर सिंह व रिंकू, पंजाब के फिरोजपुर के दिलबाग सिंह, खिड़वाली के सुरेंद्र सिंह, खुसकानी के रोहतास व रुड़की के जसबीर सिंह ने बताया कि यहां पर आंदोलनकारियों के लिए रेन बसेरे की तर्ज पर झोपड़ीनुमा कमरे बनाए जा रहे हैं। चारों ओर से ईंट और सीमेंट की दीवार और ऊपर पराली की छत बनाई जा रही है। इससे गर्मी में काफी बचाव होगा। इसके अलावा इन कमरों में खिड़की को इंतजाम भी किया जा रहा है, ताकि कूलर भी लगाए जा सकें।