बेरी। झज्जर-रोहतक नेशनल हाइवे स्थित गांव डीघल में बने टोल प्लाजा पर टोल बचाने के लिए फर्जी आईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है। टोल प्लाजा पर इस तरह के कई मामले सामने आ रहे हैं। कई आईडी ऐसी भी पकड़ी गई है, जो पुलिस, एनएचआई के अधिकारियों के स्थानीय पतों पर बनी हैं।
टोल बचाने के लिए बनाई जा रही फर्जी आईडी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकती हैं। टोल प्लाजा के मैनेजर दीपक ने बताया कि आए दिन टोल बचाने के चक्कर में फर्जी आईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले एक माह में टोल प्लाजा पर करीब 100 फर्जी आईडी पकड़ी गई है। फर्जी आईडी में पुलिस, लोकल एड्रेस फर्जी, लोकल फर्जी आरसी मिली है। टोल कर्मचारियों को आईडी पर शक होता है तो वाहन चालक आईडी को छोड़कर भाग जाता है। टोल पर आए दिन लोकल एड्रेस वाले अपने वाहनों को जबरदस्ती निकालते है ओर कर्मचारियों द्वारा टोल लेने के लिए कहा जाता है तो कर्मचारियों के साथ झगड़ा करने के लिए उतारू हो जाते है। टोल प्लाजा से हर रोजाना करीब 14 हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते है। इसमें करीब एक हजार वाहन बिना टोल दिए ही गाड़ी निकालते है। इनमें 500 इनमें पुलिस, आर्मी, दमकल विभाग, वीआईपी गाड़ी हैं। करीब 500 लोग बिना टोल दिए ही गुजर जाते हैं। विरोध करने पर लडाई झगड़े पर उतारु हो जाते हैं।
केस 1
डीघल टोल पर एक युवक ने टोल बचाने के चक्कर में एनएचआई के अधिकारी का आई कार्ड दिखाया। जब टोल बूथ पर बैठे कर्मचारी को आई कार्ड पर शक हुआ तो उसने टोल की सिक्योरिटी को बुला लिया। मामला बढ़ता देख वाहन चालक आईडी छोड़कर मौके से फरार हो गया।
केस 2
एक वाहन चालक ने पुलिस का आई कार्ड दिखाया और टोल कर्मी ने आई कार्ड को देखा तो वह किसी ओर का होने पर टोल अधिकारियों को सूचना दी ओर टोल अधिकारियों ने आई कार्ड को जब्त कर लिया। पकड़े जाने के डर से गाड़ी चालक टोल से फरार हो गया।
स्थानीय लोगों के लिए मासिक पास सुविधा
टोल प्लाजा के नियमों के अनुसार यदि वाहन चालक के पास लोकल आईडी प्रूफ है तो वह टोल प्लाजा से मासिक पास बनवा सकता है। टोल कंपनी की तरफ से छोटे वाहनों का 330 रुपये मासिक पास बनाया जाता है। फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर गाड़ी निकालने वालों में बड़ी संख्या छोटे वाहनों की होती है।
वर्जन
एक माह में करीब 100 फर्जी आईडी मिली है। इस मामले में पुलिस का पूरी तरह से सहयोग मिल रहा है। जब भी डीघल पुलिस को फर्जी आईडी व लड़ाई-झगड़े की सूचना दी जाती है तो पुलिस की टीम तुंरत टोल पर पहुंच जाती है।
दीपक, मैनेजर, टोल प्लाजा डीघल