शहीद के पार्थिव शरीर को गांव की तरफ लेकर जाते हुए सेना की टुकड़ी व युवा। संवाद
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बादली(बहादुरगढ़)। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में शहीद हुआ शहीद सत्यनारायण अपने परिवार में अकेला पुरुष था। सत्यनारायण के अलावा परिवार में उसकी दो बहनें हैं। उनकी तीन लड़कियां है, जिनमें दो शादीशुदा है। जबकि एक लड़की अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। पत्नी और लड़की उनके साथ कठुुआ में ही रहती थी। शहीद की मां पेलपा गांव के पैतृक घर रहती है। सूबेदार सत्यनारायण 1993 में सिपाही के तौर पर 158 बटालियन सिखलाइट रेजीमेंट में भर्ती हुए थे, जबकि 2013 में वह सूबेदार बने थे। जबकि 2024 में सेवानिवृत्त होना था। सेना में एक साथ रहे संपूर्ण और महाबीर गुरुग्राम ने बताया कि व्यवहार के धनी सत्यनारायण हंसमुख व्यक्ति थे। सेना में लंबे कार्यकाल के दौरान उनका आचरण सराहनीय रहा है। काम को जिम्मेदारी से निभाने के लिए बटालियन में उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। छोटी पुत्री ईशा ने बताया कि उन्हें अपने पिता की शहादत पर गर्व है। उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। पिता हमेशा उन्हें अच्छी शिक्षा के लिए प्रेरित करते थे। बार-बार शिक्षा की जानकारी भी फोन पर लेते थे।
नहीं रुक रहे मां के आंसू
कठुआ में शहीद हुए सत्यनारायण की मां लज्जा देवी की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मां का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। उन्हें जैसे ही बेटे के शहीद होने की खबर लगी तो वह घर के बाहर एक कमरे में चारपाई पर बैठ गई और बार-बार नम आंखों पाेंछती रहीं। बेटी प्रियंका और प्रिया तो पिता का पार्थिव शरीर देखकर बेहोश हो गई।
पंचायती जमीन पर दाह संस्कार
शहीद सूबेदार सत्यनारायण सिंह का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचने से पहले रात के समय ही ग्राम पंचायत की ओर से श्मशान घाट के सामने पंचायती जमीन की सफाई करवाई गई। इसमें सरपंच महाबीर गुलिया का विशेष सहयोग रहा। पंचायत की ओर से गांव में शहीद के नाम पर सार्वजनिक स्थल बनाए जाने का प्रस्ताव भी मंजूर किया जाएगा।
श्मशान घाट पर रोते हुए शहीद के बेटी ईशा। संवाद- फोटो : Bahadurgarh