फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बगैर बातचीत किए कानूनों को निरस्त करने से हो सकता है समाधान : चढ़ूनी

विज्ञापन
गुलिया खाप के नेतृत्व में चल रहे किसान आंदोलन का संबोधित करते गुरनाम सिंह चढ़ूनी। संवाद - फोटो : Bahadurgarh
विज्ञापन
बादली। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने बादली के ढांसा बॉर्डर पहुंचकर किसानों का जोश और उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो बिना बातचीत भी समाधान हो सकता है। उन्होंने 28 दिसंबर को होने वाली बातचीत पर कहा कि सरकार को तीनों कानूनों को निरस्त कर दे तो किसान अपने घर वापस लौट जाएंगे और बातचीत की जरूरत भी नहीं होगी। चढूनी ने नई रणनीति के बारे में बताया कि जब तक आंदोलन चलेगा, तब तक प्रदेश के सभी टोल फ्री करवाए जाएंगे।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि सोने की चिड़िया के नाम जाने वाला हिंदुस्तान का किसान कर्ज में डूबकर आत्महत्या करने को मजबूर है। देश के टुकड़े-टुकड़े करने का प्रयास करने वाली भाजपा के खिलाफ जनाक्रोश में आमजन किसानों के साथ एकजुट हो गया है। आंदोलन में शांति बनाए रखने के लिए उन्होंने सर्वखाप और किसानों का आभार प्रकट किया। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अनुशासन में रहते हुए आंदोलन को सफल बनाना है। जनता, पुलिस, सेना और प्रशासनिक अधिकारियों से उनका कोई विरोध नहीं है, हमें सत्ता में बैठे नेताओं और उनके कार्यक्रमों का विरोध करना है। किसान भी देश का हिस्सा हैं और उनको देश की राजधानी दिल्ली में जाने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने सड़कों को तोड़ दिया और पानी की बौछारें और आंसू गैस का प्रयोग किया, जोकि सरकार का किसान विरोध होने का प्रमाण है।
रिलायंस और स्वामी रामदेव के उत्पादों का होगा बहिष्कार
चढूनी ने कहा कि कानूनों में बदलाव मुद्दा नहीं है बल्कि उन्हें सिर्फ कानूनों को निरस्त करने के बाद ही पीछे हटना है। उन्होंने नई रणनीति के बारे में बताया कि जब तक आंदोलन चलेगा, तब तक प्रदेश के सभी टोल फ्री करवाए जाएंगे। रिलायंस और स्वामी रामदेव के उत्पादों का बहिष्कार किया जाएगा। किसी भी चुनाव में ऐसे राजनीतिक लोगों का बहिष्कार किया जाएगा, जिन्होंने किसान आंदोलन में समर्थन नहीं दिया है। उन्होंने हरियाणा में होने वाले पंचायती चुनाव के बारे में संकेत देते हुए किसानों से आह्वान किया कि बिना किसी हिंसा के सिर्फ वोट की ताकत से सत्ताधारियों को किसान की ताकत और सर्वखाप की एकता का अहसास करवाना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें