झज्जर। शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। शहर में पेयजल और सीवरेज लाइन पर 123 करोड़ रुपये की लागत से बिछाई जाएगी। पेयजल पाइप लाइन पर 57 करोड़ रुपये और सीवरेज पाइप लाइनों पर 66 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
विभाग ने एस्टीमेट तैयार कर मुख्यालय मंजूरी के लिए भेज दिया है। मंजूरी मिलने पर सीवरेज व पेयजल पाइप लाइन डाली जाएंगी ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सके और सीवरेज की लाइन भी ठीक हो सकें।
शहर के अधिकतर एरिया में पेयजल और सीवरेज लाइन छह दशक पुरानी है ऐसे में आबादी बढ़ने के कारण इन पाइप लाइनों पर लोड और लीकेज की समस्या बढ़ गई है। शहर में जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की तरफ से 2023 के बाद वैध हुई शहर की लगभग 35 कालोनियों में सीवरेज व पेयजल की नई लाइनें डाली जाएंगी।
इसके अलावा बाकी शहर में जहां भी अंडर साइज पाइप लाइनें हो गई हैं उनको भी बदला जाएगा। इसके लिए जन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पिछले दिनों पूरे शहर का सर्वे भी किया गया था जिसमें सभी पेयजल और सीवरेज लाइनों की जांच की गई थी।
वैध कॉलोनियों को होगा फायदा
जन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पेयजल लाइन बिछाई जानी है। सरकार ने अक्तूबर 2023 में शहर की 32 काॅलोनियां वैध की थीं। इसके बाद कुछ अन्य कॉलोनियां भी वैध हुई। इन कॉलोनियों में ब्लॉक गलियों व नालियों का निर्माण किया जा रहा है। मंजूरी मिलने के बाद यहां पर पानी, सीवरेज की लाइन भी डाली जाएगी। वहींए सीवरेज व पानी की लाइन डालने में समय लगेगा। मंजूरी मिलने के बाद सीवरेज व पेयजल पाइप लाइन डलने से लोगों को फायदा होगा। फिलहाल यहां पाइप लाइन नहीं बिछी हैं। इस कारण पेयजल व सीवरेज समस्या बनी रहती है।
बरसाती पानी निकासी के लिए भी डलेगी पाइप लाइन
शहर में बरसाती पानी निकासी के लिए भी पाइप लाइन डाली जाएगी। इस पर करीबन 7 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। शहर में बरसाती पानी निकासी के लिए अलग से कोई लाइन नहीं है। इस कारण बारिश आने पर शहर में पूरा पानी भर जाती है और निकासी तक कई घंटे तक नहीं हो पाती। इसके चलते बरसाती पानी निकासी के लिए भी प्रोजेक्ट तैयार कर उसका एस्टीमेट मंजूरी के लिए भेजा गया है।
वर्जन
शहर के 57 करोड़ से पेयजल, 66 करोड़ से सीवरेज और 7 करोड़ रुपये से बरसाती पानी निकासी के एस्टीमेट तैयार कर मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजे गए हैं। मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया अपनाकर काम करवाए जाएंगे। इसमें पिछले समय वैध हुई कॉलोनियां भी शामिल की गई हैं।
-अमित श्योकंद, एसई, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग