डॉ. मोनिका मलिक ने भारतीय सेना की मेडिकल कोर में कैप्टन बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। मोनिका की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव में गर्व और खुशी का माहौल है। वह मूल रूप से गांव डाबौदा खुर्द की रहने वाली हैं। फिलहाल शक्ति नगर में रह रही हैं।
मोनिका (26) की अंबाला स्थित मिलिट्री अस्पताल में छह माह की ट्रेनिंग शुरू हो गई है जहां उन्होंने ज्वाइन कर लिया है। उन्होंने एमबीबीएस करके जहां अपने छोटे दादा संतराम मलिक का सपना पूरा किया वहीं सेना में जाने के लिए सोनीपत निवासी कर्नल कमलजीत ने उनकी हर मोड़ पर मदद की।
कर्नाटक में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान उन्हीं की प्रेरणा से मोनिका ने सेना में जाने का मन बनाया था। मोनिका ने एमबीबीएस की पढ़ाई जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से पूरी की है। डॉक्टर बनने का सपना उनके छोटे दादा संतराम मलिक(दादा रामफल मलिक के छोटे भाई) का था।
मोनिका के चाचा व वार्ड-23 की पार्षद सुनैना मलिक के पति संजीव मलिक का कहना है कि मोनिका ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।
मोनिका का कहना है कि सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना उनके लिए गर्व की बात है और वह आगे भी पूरे समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगी।
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कर्नल कमलजीत ने देश सेवा के लिए किया प्रेरित
मोनिका जब छोटी थी तो वे ज्यादातर अपने छोटे दादा के पास खेलती थीं। ऐसे में उन्होंने मोनिका को डॉक्टर बनने की प्रेरणा दी। मोनिका के पिता जगपाल ने बताया कि जब मोनिका कर्नाटक में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं तो एक दिन उनकी मुलाकात सोनीपत निवासी सेना में कर्नल कमलजीत से हुई। कर्नल कमलजीत ने मोनिका को भारतीय सेना की मेडिकल कोर में शामिल होकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित किया और हर स्तर पर मार्गदर्शन व सहयोग प्रदान किया। उनकी प्रेरणा से ही मोनिका ने सेना में कैप्टन बनने का लक्ष्य तय किया।
तीन बहनों में दूसरे नंबर की बेटी
मोनिका तीन बहनों में दूसरे नंबर की बेटी हैं। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है जबकि छोटी बहन अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। मोनिका बचपन से ही पढ़ाई में मेहनती रही हैं। वह रोजाना 4 से 5 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करती थीं और अपने लक्ष्य को लेकर हमेशा गंभीर रहती थीं।