02jjrp11- शहर के पुराने तहसील रोड पर घूमते कुत्ते। संवाद
झज्जर। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर क्षेत्र में कुत्तों के बधियाकरण के आदेश दिए हैं। उसके बाद नगर परिषद ने इसके टेंडर भी निकाले लेकिन डेढ़ माह में दो बार टेंडर लगाने के बाद भी कोई एजेंसी इस काम के लिए आगे नहीं आई। ऐसे में शहर के कुत्तों का बधियाकरण अटककर रह गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कुत्तों के लिए आश्रम स्थल भी बनना प्रस्तावित है। इसके लिए नगर परिषद जगह ढूंढने में लगा है। नगर परिषद ने बेसहारा कुत्तों के बधियाकरण को लेकर दो बार टेंडर लगाया। पहली बार अगस्त में फर्म नहीं आई। इसके बाद नियमों के कुछ बदलाव किए गए और सितंबर में दोबारा टेंडर लगाए। उसमें भी कोई फर्म नहीं आई।
झज्जर में करीब 2000 बेसहारा कुत्ते
शहर में लगभग दो हजार बेसहारा कुत्ते हैं। आए दिन कुत्ते किसी न किसी को काटते रहते हैं। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 12 से 15 मामले आते हैं।
हर माह करना होगा 200 कुत्तों का बधियाकरण
टेंडर प्रक्रिया को लेकर नगर परिषद ने स्पष्ट किया है कि कुत्तों को पकड़ने, बधियाकरण, एंटी-रेबीज टीकाकरण, विरूपण, भोजन, ऑपरेशन के बाद की देखभाल के हिसाब से ही राशि दी जानी है। ठेकेदार को प्रति माह कम से कम 200 कुत्तों का ऑपरेशन करना होगा। माह के लिए निर्धारित लक्ष्य से कम ऑपरेशन करने पर प्रति कुत्ते 100 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। यह जुर्माना एजेंसी से प्रस्तुत मासिक बिल से काट लिया जाएगा।
वर्जन-
-शहर के आवारा कुत्तों के बधियाकरण का काम होना है। इसके लिए दो बार टेंडर लगाए गए लेकिन कोई फर्म नहीं आई। दोबारा से टेंडर लगाया जाएगा।
-जिले सिंह सैनी, चेयरमैन, नगर परिषद।