दिसंबर के महीने में अनुमान के अनुसार सर्दी नहीं होने से फसलों को नुकसान हो रहा है। दिन के समय मौसम में गर्मी होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस साल बादली पैक्स के अधीन आने वाले गांवों में सरसों और गेहूं की फसल का रकबा लक्ष्य के मुकाबले कम है।
सरसों की पैदावार वाले क्षेत्र में भी तापमान में गिरावट नहीं आने से किसानों ने सिंचाई कार्य शुरू कर दिया है। इस बार जमीन में नमी की मात्रा सामान्य से ज्यादा है जिसका कारण अधिक बारिश और जल भराव रहा। ऐसे में कृषि अधिकारी सुनील कौशिक ने बताया कि गेहूं की बुवाई के बाद फसल में 25 से 30 दिन बाद पहला पानी (सिंचाई) देना जरूरी है।
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सरसों की फसल पर तापमान बढ़ोतरी की वजह से एक कीट लग जाता है लेकिन अभी तक कहीं भी कीट लगने की शिकायत नहीं आई है। इसके अतिरिक्त किसानों को गेहूं पहले पानी के लिए 30 दिन से ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए। नमी वाले क्षेत्र में सरसों सिंचाई में देरी करनी चाहिए।
किसान जगदीश, सोमबीर और दयाकिशन का कहना है कि दिसंबर के शुरू में ही ठंड बढ़ जाती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। दिसंबर में अभी तक तापमान दिन के समय 22 डिग्री पर है जबकि रात का तापमान 11 डिग्री तक गिरा है। दिन और रात के तापमान अंतर ज्यादा होने से फसलों को नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। दिन के समय धूप खिलने से रबी सीजन की मुख्य फसल सरसों खतरे में है।