-फोटो 64 : कथा के दौरान नाचती-गाती महिलाएं। स्रोत आयोजक
बहादुरगढ़। सेक्टर-2 स्थित गौरीशंकर मंदिर में चल रही भगवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते हुए आनंद लिया। कथा व्यास सुभद्रा कृष्ण ने अपने प्रवचन में बताया कि गीता में भगवान कृष्ण ने कहा कि जब धरती पर पाप बढ़ते हैं तो मैं अवतार लेता हूं। धर्म का अर्थ है धारण करना, हमें सदगुणों को धारण करना है।
उन्होंने कहा कि आज हमारे अंदर सत्य असत्य का महाभारत है, धर्म अधर्म का महाभारत है, हमें इस पर विजय पानी है। गीता का संदेश हमें इस पर विजय पाना सिखाता है। ये स्वयं परमात्मा द्वारा दिया गया संदेश है, हमें हर समस्या से बाहर निकलने का रास्ता बताता है। गीता का ज्ञान हमारे मार्ग को प्रशस्त करता है। गीता का ज्ञान हमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार से दूर रह कर शुभ कर्म करने की ओर अग्रसर करता है। हमें अपनी वाणी पर भी संयम रखना चाहिए। हमें किसी भी रूप में धैर्य नहीं खोना है और वाणी को वश में रखना है और प्रभु में विश्वास रखते हुए किसी को भी कष्ट नहीं पहुंचाना है। उन्होंने कहा, हमें अपने जीवन में कृष्ण के आदर्शों को अपनाना है, कृष्ण ने अपने बाल सखा को गले से लगाया और बिना बताए सब वैभव उसे दे दिया। कृष्ण को जन्म से ही संकटों का सामना करना पड़ा पर वो कभी घबराये नहीं, मंद मुस्कान उनके चेहरे पर हमेशा बनी रही। हमें भी ऐसा ही बनना है। सुख और दुख में सम रहने का ही प्रयास करना है। ऐसा करने से ही जीवन में कभी भी कोई अवरोध नहीं आता है और कोई अवरोध आ भी जाए तो वो प्रभु कृपा से स्वयं ही दूर हो जाता है।