ल्हावास। क्षेत्र के गांव खानपुर खुर्द में कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्वालु।
साल्हावास। क्षेत्र के गांव खानपुर खुर्द के हनुमान मंदिर में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथावाचक गौ सुता अंजलि ने श्रीराम वनवास की कथा का प्रसंग सुनाया। इसे सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए।
राम वनगमन की कथा शुरु हई तो श्रोताओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। वहीं कथावाचक ने भरत राजगद्दी कथा का वर्णन किया। कथावाचक गौ सुता अंजलि ने श्रद्धालुओं का श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए कहा कि अयोध्या के कोप भवन में कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वचन मांगे। इस पर राजा दशरथ ने कहा कि रघुकुल रीति सदा चल आई, प्राण जाई पर वचन न जाई। यह सुनते ही कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो वचनों में से पहला वचन अपने पुत्र भरत को अयोध्या की राजगद्दी मांग ली तथा दूसरा भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मांगा। कैकेयी के यह कटु वचन सुनते ही महाराजा दशरथ के होश उड़ गए। वहीं जब भगवान श्रीराम को इस बात का पता चला तो वह पिता के वचन को निभाने के लिए वन जाने को खुशी-खुशी तैयार हो गए। भगवान श्रीराम के वन जाने की बात सुनते ही माता सीता व लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने को तैयार हो गए। राम जी के मना करने के बाद भी लक्ष्मण नहीं माने। जिसके बाद तीनों अयोध्या से वन के लिए निकल पड़े।