अस्पताल प्रशासन ने मुख्यालय को मांग भेजी, लेकिन अभी तक नहीं मिली दवा,
अस्पताल में आने लगे सांप से काटने के मरीज,
-एक सप्ताह में दो मामले आए, दोनों को किया गया रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। बरसात के दिनों में सांप काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। सांप काटने के बाद समय पर उपचार मिलने पर पीड़ित की जान बचाई जा सकती है लेकिन झज्जर के सरकारी अस्पताल में सांप काटने पर उसके इलाज के लिए प्रयोग होने वाली एंटी स्नेक वेनम दवा नहीं है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से उसकी मांग भेजी गई है लेकिन अब तक दवा नहीं आई है।
सिविल अस्पताल में सांप काटने के मामले आने लगे हैं। दस दिन में सांप काटने के दो मामले सामने आ चुके हैं और एंटी स्नेक वेनम न होने के कारण मरीज को रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ा है। कई बार उचित जानकारी के अभाव में और झाड़ फूंक के चक्कर में देरी हो जाती है और पीड़ित व्यक्ति की मौत हो जाती है, इसलिए सांप काटने के मामले में बचाव के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता। बहुत से लोग सांप काटने पर झाड़ फूक आदि में समय बर्बाद कर देते हें बेहतर है कि समय बर्बाद करने की बजाय सीधे अस्पताल जाकर चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
सांप की पहचान होने पर इलाज में आती है आसानी
चिकित्सकों की माने तो सांप की पहचान होनी चाहिए या उसका फोटो खींच ले ताकि इलाज के दौरान चिकित्सक को आसानी हो सके। कई बार सांप जहरीले नहीं होते, ऐसे में यदि उसकी पहचान न हो और डॉक्टर उसे एंटी स्नेक वेनम दे दे तो वह भी उसके लिए घातक सिद्ध हो सकती है।
सांप काटने के लक्षण
उल्टी, शॉक, अकड़न या कंपकंपी, एलर्जी, पलकों का गिरना, घाव के चारों ओर सूजन, जलन और लाल होना, त्वचा के रंग में बदलाव, दस्त बुखार, पेट दर्द, सिरदर्द, जी मिचलाना. लकवा मारना, पल्स (नब्ज) तेज होना, थकान, मांसपेशियों की कमजोरी, प्यास लगना, ब्लड प्रेशर कम होना।
सांप काटने पर तुरंत यह करें
-तुरंत एंबुलेंस को कॉल करें।
-व्यक्ति को सांप से दूर ले जाएं।
-यदि घाव दिल के नीचे है तो व्यक्ति को लेटा दें।
-व्यक्ति को शांत और आराम से रखें और जहर को फैलाने से रोकने के लिए जितना संभव हो सके व्यक्ति को स्थिर रखें।
-घाव को ढीली और साफ पट्टी से कवर करें।
-प्रभावित हिस्से से किसी भी गहने या टाइट कपड़े को हटा दें।
-यदि सांप ने पैर पर काटा है तो जूतों को निकाल दें।-
सांप के काटने के समय का ध्यान रखें।
ये नहीं करें
-डॉक्टर द्वारा निर्देशित किए जाने तक व्यक्ति को कोई दवा न दें।
-जहर को बाहर चूसने का प्रयास न करें।
-घाव पर ठंडे बर्फ का प्रयोग न करें।
-व्यक्ति को अल्कोहल या कैफीन युक्त पेय न दें।
-पीड़ित को चलने न दें, उन्हें वाहन से लेकर जाएं।
-सांप को मारने या पकड़ने का प्रयास न करें। यदि संभव हो तो सांप की तस्वीर लें।
-किसी भी पंप सक्शन डिवाइस का उपयोग न करें।
वर्जन
सिविल अस्पताल में फिलहाल एंटी स्नेक वेनम नहीं है। इसकी मांग भेजी गई है। जल्द ही आने की उम्मीद है। बरसात को देखते हुए सांप कांटने के केस आ रहे हैं, ऐसी स्थिति में पीड़ितों को रोहतक रेफर कर दिया जाता है।
डॉ. नरेश दहिया, एमएस, सिविल अस्पताल, झज्जर