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26 तक मांगें मानने की बात लिखित में नहीं देगी सरकार तो करेंगे दिल्ली कूच : मलिक

Tue, 21 Mar 2017 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
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झज्जर। सरकार जब तक हमारी मांगें नहीं मानेंगी तब धरनों की तस्वीर पहले जैसी ही बनी रहेगी। सरकार जब तक पूर्ण रूप से लिखित में मांग पत्र को मंजूरी नहीं देती, तब तक धरना स्थल की कमेटी धरनों की देखरेख करेगी। वर्तमान में धरनों पर भीड़ बढ़ाने की जरूरत नहीं है। ये बातें जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने सोमवार को राशलवाला चौक पर पहुंचकर चल रहे धरनास्थल पर कहीं। प्रदेश सरकार और संघर्ष समिति के सदस्यों की मीटिंग में हुई सहमति के बाद वे झज्जर के राशलवाला चौक पर चल रहे धरने पर पहुंचे थे।
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उन्होंने कहा कि जिसको भी जब भी टाइम लगे धरना स्थल पर आ जाना और अब खेती बाड़ी की कटाई का समय भी नजदीक आ गया है इसलिए बाकी किसान कामकाज संभाले। सरकार द्वारा मांगे मान ली गई हैं, जिसको लिखित रूप देने के लिए 26 मार्च का समय निश्चित किया गया है। अगर सरकार उनकी मांगें मानने की बात लिखित में नहीं देती है तो वे दिल्ली कूच करेंगे। दिल्ली कूच की तैयारी रखें।
धरना स्थल पर पहुंचे आरक्षण समिति के राष्ट्रीय महासचिव अशोक बल्हारा ने कहा कि सरकार ने जाटों की एकता को देखते हुए दबाव में आकर उनकी मांगों को माना है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में सरकार उनके साथ किसी प्रकार का छल करती है तो वे सरकार को अपनी और प्रकार की ताकत दिखाने के लिए भी मजबूर होंगे।
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डेढ़ घंटा लेट पहुंचे यशपाल मलिक
सरकार के फैसले के बाद सोमवार को धरना स्थल पर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने के इंतजार में दोपहर तक लगातार भीड़ बढ़ती रही। अपने तय समय से डेढ़ घंटा लेट करीब साढे़ 12 बजे यशपाल मलिक धरना स्थल पर पहुंचे। जहां पर लोगों ने मलिक का फूल मालाओं के साथ स्वागत किया गया और मंच को संबोधित कर रहे स्थानीय जाट नेताओं ने मलिक को दीनबंधु छोटूराम की संज्ञा भी दी। जाट वक्ताओं ने जाट बिरादरी के अलावा अपनी इस जीत में अन्य सभी बिरादरियों का भी धन्यवाद किया और कहा कि अब की बार सभी बिरादरियों से साथ होने के कारण उन्हें अपना हक मिला है।

अब धरने पर बैठने की जरूरत नहीं
यशपाल मलिक ने धरने के संबोधन में कहा कि अब हमें अपनी ताकत का अंदाजा हो गया है। उन्होंने कहा कि अब सरकार से किसी बात को मनवाने के लिए धरने करने की जरूरत नहीं है बल्कि इसके लिए सरकार को 24 घंटे का समय देते हुए तैयारियां करो और दिल्ली के लिए कूच कर दो। इसके दबाव में सरकार आपकी मांगों को मानने के लिए मजबूर होगी।

26 के बाद होगा पूर्ण रूप से धरना खत्म
यशपाल मलिक ने कहा कि सरकार ने उनकी मांगों को पूर्ण रूप देने के लिए डेढ़ महीने का समय मांगा है। तब तक सभी लोग अपने घर जाकर खेती बाड़ी का काम संभल सकते हैं। अब धरना स्थल पर भीड़ दिखाने की जरूरत नहीं है। गेहूं की कटाई का समय भी सिर पर आ गया है और सरकार ने मांगे भी मान ली गई हैं। अत: सभी अब अपना कामकाज संभाले। लेकिन 26 अप्रैल तक धरना स्थल पर लगा टेंट और अन्य व्यवस्थाएं जैसी की तैसी ही बनी रहेंगी। जिसको भी टाइम लगे धरना स्थल पर चक्कर लगाते रहना।

सुरक्षा के रहे कड़े प्रबंध
यशपाल मलिक के झज्जर में आगमन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह से चौंकन्ना रहा और सभी मार्गों पर आम दिनों की तुलना में ज्यादा सुरक्षा बरती गई। बड़ी संख्या में पुलिस व अर्द्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया था। जिला उपायुक्त आर. सी. बिढ़ाण और पुलिस अधीक्षक बी सतीश बालन पल-पल की खबर कनिष्ठ अधिकारियों से लेते रहे और सरकार और उच्चाधिकारियों को भी हर घटनाक्रम की सूचना भेजने का सिलसिला जारी रहा। बहादुरगढ़ रोड़ पर भीड़ जुटने के कारण पुलिस ने अन्य वाहनों का आवागमन बंद करा दिया और दूसरे मार्गों से वाहनों का आवागमन दोपहर बाद तक जारी रहा।

मंगलवार को बहाल होंगी रोडवेज सुविधाएं
रोडवेज विभाग की सेवाएं सोमवार को भी अन्य दिनों की तरह ही लोगों को उपलब्ध नहीं हो पाई। ग्रामीणों रूटों पर केवल निजी बसों या वाहनों के सहारे ही लोगों को सफर करना पड़ा। वहीं जिला प्रशासन के पास गई 53 बसों का अगले एक या दो दिन तक वापस मिलना संभव नहीं है। इसके अलावा सूरजकुंड भेजी गई 30 बसें रोडवेज बेड़े में मंगलवार से शामिल हो जाएंगी। इससे कुछ हद तक लोगों को राहत मिलेगी। वहीं रोडवेज जीएम बलवंत गोदारा का कहना है कि आंदोलन के चलते हर दिन करीब 5 से 6 लाख रुपये का नुकसान रोडवेज को उठाना पड़ रहा है।
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