यह दूषित पानी आगे चलकर नजफगढ़ ड्रेन के माध्यम से दिल्ली में यमुना नदी में मिल जाता है जिससे नदी के प्रदूषण स्तर में इजाफा हो रहा है। छोटूराम नगर स्थित एसटीपी में प्रतिदिन करीब 12 एमएलडी सीवेज पहुंच रहा है।
प्लांट का रेनोवेशन न होने के कारण इसे हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्धारित मानकों के अनुरूप ट्रीट नहीं किया जा रहा।
जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से मजबूरी में इस पानी को बिना उपचार के ही ड्रेन में बहाया जा रहा है। बारिश के समय नजफगढ़ रोड पर स्थित 36 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी पर भी ओवरलोड की समस्या सामने आती है।
पानी की अधिकता के कारण वहां से भी अतिरिक्त सीवेज को सीधे उसी ड्रेन में छोड़ दिया जाता है जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है। जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ नितिन ने बताया कि छोटूराम नगर एसटीपी में आने वाला सीवेज फिलहाल बोर्ड के मानकों के अनुसार ट्रीट नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्लांट के रेनोवेशन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी ताकि सीवेज का उचित उपचार कर प्रदूषण को रोका जा सके। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से मांग की है कि रेनोवेशन कार्य में तेजी लाई जाए ताकि यमुना को और अधिक प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
वर्जन
छोटूराम नगर का एसटीपी हर साल बारिश के मौसम में पानी में डूब जाता है। इसी वजह से पूरा नगर हर साल बाढ़ की स्थिति का सामना करता है। इस बार भी यह प्लांट डूबने से शहरवासियों को काफी परेशानी हुई थी। प्लांट का पानी सीधा ही ड्रेन में डाला गया था।
हरिमोहन धाकरे, पूर्व पार्षद
एसटीपी पर सीवेज के ट्रीटमेंट की प्रक्रिया ठप पड़ी है। इस कारण हर साल बारिश के मौसम में आधा शहर सीवर की समस्या से जूझता है। प्रशासन से मांग है कि इस प्लांट को जल्द से जल्द रेनोवेट किया जाए।
युवराज छिल्लर, पूर्व पार्षद