फोटो-54: बहादुरगढ़ के सेक्टर छह में लगी प्रदर्शनी में अपने द्वारा बनाए अचार के डिब्बों का स्टाल
बहादुरगढ़। मजबूत इरादे और सही सोच हो तो घर बैठे भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है। इस बात का उदाहरण हैं सेक्टर-7 निवासी बिमला मुदगिल। कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब अधिकांश लोग रोजगार को लेकर चिंतित थे, उसी समय बिमला के मन में घर से ही कुछ नया करने का विचार आया और अचार बनाने का काम शुरू किया।
शुरुआत में बिमला ने घर में ही सीमित मात्रा में आम, नींबू और हरी मिर्च का अचार तैयार किया और आसपास के लोगोंं को सप्लाई किया। शुद्ध मसालों और घरेलू तरीके से बने अचार का स्वाद लोगों को इतना पसंद आया कि धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ने लगी। दूर-दराज से भी लोग उनके अचार की फरमाइश करने लगे।
मांग बढ़ने पर बिमला ने अचार के व्यवसाय को व्यवस्थित रूप देने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) का लाइसेंस भी मिल गया। इससे उनका काम पूरी तरह वैध और भरोसेमंद बन गया। बिमला का अचार बाजार में आधा किलो के डिब्बे में उपलब्ध है, जिसकी कीमत 130 से 150 रुपये रखी गई है।
बिमला ने बताया कि वर्तमान में वह घर बैठे हर माह करीब 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। हाल ही में सेक्टर-6 में आयोजित एक प्रदर्शनी में भी बिमला ने अपने अचार का स्टॉल लगाया। लोगों ने उनके अचार की जमकर सराहना की।
कई लोगों ने मौके पर ही खरीदारी की तो कई ने ऑर्डर भी दिए। इस प्रदर्शनी ने बिमला के उत्पाद को नई पहचान दिलाने का काम किया। बिमला मुदगिल का कहना है कि अगर महिलाओं को सही दिशा और आत्मविश्वास मिले तो वे घर की चारदीवारी में रहकर भी सफल उद्यमी बन सकती हैं।
प्रदर्शनी में आए जनजागरण समिति के सदस्य समाजसेवी राजकुमार अरोड़ा ने बताया कि बिमला का अचार काफी लाजवाब है। प्रदर्शनी में भी उनके अचार की काफी सराहना की जा रही है।