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पूरे साल गूंजती रही बेटियों की किलकारी, लाड़लियों के लिए शुभ रहा साल 2016

Fri, 23 Dec 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
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झज्जर।
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साल 2016 बेटियों के लिए बड़ा शुभ रहा। जिले में लिंगानुपात के आंकड़ों में खासा सुधार इस वर्ष में देखने को मिला। बेटियों को बचाने के लिए जो मुहिम सरकार व सामाजिक संगठनों के द्वारा चलाई गई, वो इस बार रंग लाई। बेटियों को कोख में कत्ल करने के लिए बदनाम हो चुके प्रदेश की साख अब फिर से अच्छी होने लगी है। इस साल कई महीने तो ऐसे रहे जब लिंगानुपात का आंकड़ा 985 तक पहुंच गया। अमर उजाला ने भी बेटियों को सम्मान दिलाने के लिए इस साल बेटी जन्म पर कुआं पूजन को लेकर मुहिम चलाई थी। इसके सकारात्मक परिणाम निकलकर सामने आए।

हर माह बढ़ रही लड़कियों की संख्या
गत वर्ष के मुकाबले इस बार हर माह लड़कियों की संख्या बढ़ने लगी है। गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष बेटियों ने अधिक जन्म लिया है। जिससे लिंगानुपात में काफी सुधार हुआ है।
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ये रहा  लिंगानुपात का ग्राफ

महीना          बेटे                 बेटियां           अनुुपात
जनवरी         719                597              830     
फरवरी         672                 544              809
मार्च           571                  468              819
अप्रैल          583                 515               883
मई             606                  510              841
जून            637                  567               887
जुलाई          620                  578              932
अगस्त         802                   790             985
सितंबर         845                  724              856
अक्तूबर        832                  760              913
नवंबर          750                  698              930
कुल            7639                6751             883

सुखद रही एमसीटीएस पोर्टल की शुरूआत
जिला स्वास्थ्य विभाग एनआरएचएम की तरफ से मदर चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम पोर्टल की शुरूआत की गई। इसके तहत जिले में तैनात सभी एएनएम व आशा वर्क्स को घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को चिह्नित करने का कार्य सौंपा गया तथा उनकी जानकारी एमसीटीएस पोर्टल पर अपलोड की गई। ये एएनएम और आशा वर्कर प्रथम ट्राइमेस्टर गर्भ धारण से डिलीवरी के बाद इम्युनाइजेशन तक महिलाओं को मॉनीटर करती हैं व उसकी जानकारी एमसीटीएस पोर्टल पर अपलोड करवाती है। अगर मोनिटरिंग के दौरान कोई महिला अपना गर्भपात करवाती है तो उसके कारणों को भी जांचा जाता है। इस अभियान के चलते लिंग जांच करवाकर गर्भपात करवाने वाली महिलाओं की संख्या भारी कमी आई। जो कि विभाग की सफलता का कारण बनी। साथ ही विभाग ने अपने कर्मचारियों को एक विजिलेंस विभाग स्थापित करवाया। जो लिंग जांच करने वाले चिकित्सकों व दलालों पर पैनी नजर रखता है। इस विभागीय विजिलेंस के चलते कई बड़ी मछलियां जाल में फंसी। फलस्वरूप अन्य अवैध गर्भपात व गर्भ जांच करवाने वाले चिकित्सक भी डरकर इससे किनारा करने लगे।

कई जगह की गई छापामारी
2015 के जिले में लिंगापुनात को चौंकाने वाले आंकड़ों को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने उप सिविल सर्जन डॉ. राकेश के नेतृत्व में टीम बनाकर लिंगानुपात गिराने वाले कारणों का अध्ययन किया व उसे बढ़ाने के लिए विभिन्न अभियान शुरू किए। इन अभियानों के तहत जिले के अधिकतम अल्ट्रासाउंड केन्द्रों पर छापामारी की। वहीं आंगनबाड़ी सुपरवाइजर, आशा वर्कर व विभिन्न एनजीओ को प्रशिक्षण देकर लिंग जांच के खिलाफ महिलाओं को जागरूक करने का कार्य सौंपा गया है। आशा वर्कर व आंगनबाड़ी वर्कर को उन दलालों को चिह्नित करने को कहा गया जो गर्भवती महिलाओं का लिंग जांच करवाते थे।

कई जगह पकड़ी एमटीपी किट
औषधीय विभाग के डीसीओ संदीप हुड्डा की टीम को जिले में बिक रही एमटीपी किट पर लगाम लगाने का काम सौंपा गया है। डीसीओ व उनकी टीम द्वारा जिले में सभी दवा विक्रेताओं को एमटीपी किट ना बेचने बाबत सख्त आदेश दिए गए। साथ ही टीम ने जगह-जगह छापे मारकर जिले में 90 प्रतिशत तक एमटीपी किट की बिक्री पर लगाम लगा दी। इस कारण लोगों को इस गर्भपात की उपलब्धता बंद हो गई। यही वह दवा थी जो कि गर्भवती महिलाएं लिंग जांच करवाने के बाद आसानी से दवा की दुकानों पर खरीदकर गर्भपात जैसे घिनौने कार्य को अंजाम देती थी।

पंच-सरपंचों के साथ बैठक भी की
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. राकेश द्वारा जिले के ग्राम पंचों, सरपंचों व ब्लाक आशा कोआर्डिनेटरों के साथ समय-समय पर मीटिंगों का सिलसिला शुरू किया गया। ग्राम पंचों, सरपंचों व गर्भवती महिलाओं को लिंग जांच न करवाने व लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए शपथ दिलवाने का अभियान शुरू किया गया। इस अभियान का नतीजा है कि इस जिले का लिंगानुपात बढ़ने लगा।


लिंगानुपात बढ़ाने के लिए विभाग के द्वारा काफी प्रयास किए गए थे, जिसका परिणाम सभी के सामने है। नवंबर तक के आंकड़ों के अनुसार जिले में 1000 बेटों के पीछे 883 बेटियां हैं, वहीं इस वर्ष तो कुछ महीनों में ये आंकड़ा 900 के पार भी रहा।
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- डा. राकेश, नोडल अधिकारी, पीएनडीटी।

लिंगानुपात को बढ़ाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्हें बड़ी खुशी है कि इस बार लिंगानुपात में सुधार हुआ है। जिला प्रशासन के द्वारा लिंगानुपात सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।
- आरसी बिढाण, डीसी, झज्जर।
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