बहादुरगढ़। सोमवार देर रात इलाके में आंधी-तूफान आई। इससे कई जगह पेड़ गिर गए। आंदोलनकारी किसानों के पड़ाव में किसानों के तंबू तहस नहस हो गए। आंधी इतनी तेज थी कि किसानों को अपने टेंटों के जमीन में गड़े हुए पाइपों को पकड़कर बैठना पड़ा। मंगलवार को किसान सुबह ही अपनी झोपड़ियों को ठीक करने में लग गए। किसानों ने कहा कि ऐसी आपदाएं उनके संकल्प को कम नहीं कर सकती, मांगें पूरी हुए बिना वापस नहीं जाएंगे।
मई माह में आंदोलनकारी किसानों को कई बार प्रतिकूल मौसम का सामना करना पड़ा। अंतिम सप्ताह में लगातार तीन दिन तो बारिश आई और आंधी आई। एक दिन ताउते तूफान का और दो दिन यास का असर झेलना पड़ा। सोमवार रात आए तूफान ने दिल्ली की सीमाओं पर बैठे आंदोलनकारी किसानों का बड़ा नुकसान कर दिया। तूफान इतना तेज था कि किसानों को सारी रात अपने अस्थायी घरों और पंडालों की पाइपें को पकड़कर काटनी पड़ी। टेंटों की छतों को तूफान उड़ा कर ले गया। अस्थायी बाथरूम और पाखाने तोड़ दिए। तूफान के कारण कुछ हिस्से में बिजली की सप्लाई ठंप हो गई।
मौसम चाहे जितना अधिक खराब हो गया हो किसानों के हौसलों में कमी नजर नहीं आई। नयागांव चौक के पास भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) का टेंट टूट गया। इससे पहले भी एक बार टेंट तहस नहस हो गया था। किसानों ने पंडाल के लिए दूसरी बार मंगलवार को नया टेंट मंगवा लिया। सारा प्रबंध नए सिरे से किया गया। बीबी गुलाब कौर नगर में तमाम किसानों ने खुद कार सेवा कर सारी व्यवस्था दुरुस्त की।
जगराज सिंह, प्रीत समालसर और अजायब सिंह ने कहा स्टेज को फिर तैयार कर दिया है। होशियारपुर के गांव लंगेरी के किसान अवतार सिंह लंगेरी और सरपंच सुखदेव सिंह, बठिंडा के बसंत सिंह और नौजवान भारत सभा के नेता अश्वनी ने आंदोलनकारियों के लिए एक लाख रुपये, 150 किलोग्राम सूखा दूध और 50 किलोग्राम चीनी दी।
भाकियू एकता (उगराहां) के पंजाब राज्य सचिव सिंगारा सिंह मान, महिला किसान नेता हरिंदर कौर बिंदु ने कहा कि इस आंधी-तूफान जैसी आपदाएं किसानों के हौसले को कम नहीं कर सकती। किसानों का संकल्प पक्का है। तीनों कानून निरस्त होने से पहले किसान अपने घर नहीं लौटेंगे।