कॉलोनी काटने वाले निवेशकों में असमंजस की स्थिति
संवाद न्यूज़ एजेंसी
बादली। दादरी तोय, नंगला और कुतानी गांवों को कंट्रोल एरिया घोषित किए जाने के बाद क्षेत्र की जमीनों के भाव पर असर पड़ना शुरू हो गया है। इन गांवों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में निवेशकों ने करोड़ों रुपये लगाकर कृषि भूमि और प्लॉट खरीदे थे। अब कंट्रोल एरिया की अधिसूचना लागू होने के बाद भविष्य में निर्माण गतिविधियों और भूमि उपयोग संबंधी नियमों को लेकर कॉलोनी काटने वाले निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
गांवों की जमीनें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के प्रभाव क्षेत्र में होने और दिल्ली-गुरुग्राम के निकट होने के कारण निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। प्रॉपर्टी डीलरों ने विभिन्न विकास परियोजनाओं और भविष्य में शहरी विस्तार का हवाला देकर बड़ी संख्या में लोगों को यहां निवेश के लिए प्रेरित किया। इसके चलते जमीनों के दाम लगातार बढ़ रहे थे।
20 दिन में प्रॉपर्टी का बाजार धड़ाम से गिर गया है। शनिवार और रविवार को गुड़गांव और दिल्ली से आने वाले ग्राहक अब मुंह मोड़ गए हैं। क्योंकि सरकार के नए नियम अनुसार कंट्रोल एरिया घोषित होने के बाद अब किसी भी प्रकार के निर्माण और विकास कार्य के लिए संबंधित विभागों की अनुमति आवश्यक होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नई पाबंदियों और नियामकीय प्रक्रियाओं के कारण अल्पकालिक रूप से जमीनों की खरीद-फरोख्त की गति धीमी हुई है। वहीं कुछ निवेशक भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं, क्योंकि उन्होंने ऊंचे दामों पर जमीन खरीदी थी।
वहीं जिला योजना कार्य अधिकारी (डीटीपी) मंजू का कहना है कि कंट्रोल एरिया घोषित करने का उद्देश्य क्षेत्र में सुनियोजित विकास सुनिश्चित करना और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाना है। इससे भविष्य में बुनियादी सुविधाओं के विकास और व्यवस्थित शहरी नियोजन को बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल भूमि मालिकों, निवेशकों और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों की निगाहें सरकार की आगामी नीतियों और विकास योजनाओं पर टिकी हुई हैं।