गांव डीघल निवासी अनिल रविवार को घर से टोल प्लाजा पर ड्यूटी के लिए गया था। वापस नहीं लौटा, चिंतित परिजनों ने तलाश की तो उसका शव झज्जर के सिविल अस्पताल में मिला।
दो दिन बाद मंगलवार को पोस्टमार्टम हुआ। परिजनों का आरोप है कि हमारा बेटा आंदोलन में उपद्रवियों की भेंट चढ़ गया। मृतक अनिल के भाई प्रदीप ने बताया कि अनिल चार भाईयों में दूसरे नंबर पर था और शादीशुदा नहीं था।
अब चार भाईयों में से तीन भाई रह गए हैं और अनिल अपना खर्चा-पानी चलाने के लिए झज्जर-रोहतक नेशनल हाईवे पर बने डीघल टोल प्लाजा पर हेल्पर का कार्य करता था और बीती 21 फरवरी को भी अनिल घर से हर रोज की तरह डीघल टोल प्लाजा पर गया था और पूरे प्रदेश में जाट आरक्षण को लेकर हिंसा मची हुई थी और जब अनिल घर वापस नही लौटा तो परिवार वालों को चिंता भी सताने लगी और जब झज्जर में उपद्रव मच रहा था तो बताया जा रहा है कि अनिल अपने साथियों के साथ झज्जर मे चला गया और हिंसा में मौत हो गई।
मृतक के भाई प्रदीप ने बताया कि अनिल के सिर में गोली लगी है जिससे उसकी मौत हो गई। परिजनों की माने तो परिवार में अनिल के परिवार में बड़ा भाई प्रदीप ही बहादुरगढ़ में लकड़ी का कार्य करके घर का गुजरा चलाता है और परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से सरकार से मुआवजे की मांग की है।