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एक माह तक डीजीपी कार्यालय तक खाई ठोकरें, कोर्ट से चार दिन में मिला न्याय

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
दुजाना चौकी में हुए घटनाक्रम को लेकर अमर उजाला टीम ने पीड़ित परिवार से विशेष बातचीत की। इस दौरान पीड़ित परिवार का दर्द छलक गया। पीड़ित वृद्ध दंपति ने बताया कि उन्होंने एक माह तक एसएचओ से लेकर डीजीपी के दर तक धक्के खाए, लेकिन किसी ने उनकी बात को नहीं सुना। जिस पर उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया तो केवल चार दिन में ही कोर्ट ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए।
पीड़ित दंपति के अनुसार उन्हें सबसे ज्यादा दुख तो इस बात का है कि उसका पूरा परिवार पुलिस में हैं। इसके बावजूद भी उनके साथ पुलिस चौकी में ऐसा बर्ताव हुआ। साधारण आदमी को तो न्याय की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए। पीड़ित वृद्ध दंपति के अनुसार उसका बेटा हवलदार, बेटी एएसआई और पुत्रवधू पुलिस विभाग में क्लर्क के पद पर है।
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बर्बरता की कहानी पीड़िता की जुबानी

कुर्सी पर बैठे तो दी जातिसूचक गालियां
पीड़िता ने बताया कि 26 अक्तूबर को मेरा देवर शराब पीकर हमसे झगड़ा कर रहा था। जिसकी शिकायत मैंने 1091 नंबर पर फोन करके दी। फोन उठाने वाली महिला पुलिसकर्मी ने मुझसे गंदी भाषा में बात की और कुछ देर में घर पर पुलिस भेजने की बात कहते हुए फोन काट दिया। इसके करीब पौने घंटे बाद पुलिस घर पहुंची। चौकी प्रभारी पवनवीर को हमने पूरी बात बताकर शिकायत देनी चाही तो वो बोले कि सीएम कार्यक्रम के कारण वो व्यस्त हैं, कल सुबह चौकी में आकर शिकायत दे जाना। अगले दिन 27 अक्तूबर को जब वे चौकी में शिकायत देने गए तो वहां पर मौजूद अनिल कुमार ने शिकायत लेते हुए कहा कि ठीक है तुम घर जाओ अब, हम तुम्हें फोन करके बुला लेंगे। शाम करीब चार बजे उनके पास फोन आया कि अपने पति को साथ लेकर चौकी में आ जाओ। जब हम चौकी पहुंचे तो वहां पर सिविल कपड़ों में मौजूद एक पुलिसकर्मी से पूछा कि चौकी इंचार्ज साहब कब आएंगे, उसने बताया कि कुछ देर में आ जाएंगे। जिस पर मैं, मेरे पति व मेरे 2-2 साल के दोनों पौत्र-पौत्री कुर्सियों पर बैठ गए। कुछ ही देर में चौकी इंचार्ज आ गए। उन्होंने आते ही हमारी तरफ देखकर जातिसूचक गाली देते हुए कहा कि इन्हें कुर्सियां किसने दी, नीचे पटको इन्हें। जिस पर मेरे पति ने कहा कि हमारी जाति से अनुमान मत लगाओ, मैं भी सीआरपीएफ में एसआई रह चुका हूं। इतना सुनते ही चौकी इंचार्ज ने डंडा उठाकर मेरे पति के पैर पर दे मार। जिससे उन्हें खून निकलने लगा।

चौकी में दादा को पिटता देख चिल्लाने लगे पौत्र-पौत्री
चौकी इंचार्ज के डंडा मारते ही चौकी में मौजूद पुलिस कर्मचारी एएसआई अनिल कुमार, हरीश कुमार, यशविंद्र, रविंद्र व प्रवीन ने भी थप्पड़, लात-घूसों से मेरे पति की पिटाई करनी शुरू कर दी और इस पिटाई से मेरे पति नीचे गिर गये। मेरे पौत्र-पौत्री जोर-जोर से चिल्लाने लग गये। मैंने कहा मेरे पति को मत मारो तो चौकी इंचार्ज ने गुस्से में कहा कि इसको भी मारो। पति को पिटाई से बचाने के लिये मैं अपने पति के ऊपर गिर गई तो चौकी प्रभारी पवनवीर ने मेरी कमर, पैरों, हाथों व शरीर के पिछले हिस्से के दूसरे अंगों पर डंडो से मारना शुरू कर दिया।

सलवार का नाड़ा तोड़ा, बनियान फाड़ दी
पीड़िता ने बताया कि मेरे दोनों हाथों की कलाई पवनवीर एएसआई ने पकड़ ली और हरीश कुमार को कहा कि इसको नंगा कर दो और इसकी सलवार का नाड़ा तोड़ दो और इसके पिछले हिस्से पर मारो। फिर पवनवीर ने अनिल कुमार से कहा कि तू इसके हाथ पकड़, जिसने मेरे दोनों हाथ जोर से पकड़ लिये। जिससे मेरे हाथ की चूड़ियां मेरे हाथ में चुभ गई और खून आया और मेरी चूड़िया टूटी हुई चौकी में ही पड़ी रह गई। जब मैं अपने पति को बचाने के लिये पड़ी थी तो अनिल व नरेश, पवनवीर व यशविंद्र ने मेरे पैरों पर अपने पैर रख लिये और हरीश ने मेरी सलवार का नाड़ा तोड़ दिया। जिसने मेरी सलवार को नीचे कर दिया। इसके बाद पवनवीर ने डंडे मारे और प्रवीन ने मेरा पहना हुआ कमीज व नीचे की बनियान दोनों प्राईवेट पार्ट में अपनी उंगलियां डालकर फाड़ दिये। इसके बाद यशविंद्र व पवनवीर ने हमारे को लात मारी तथा मेरे साथ गलत काम करने की कोशिश करने लगे तो मैंने कहा कि हमारे साथ ऐसा सलूक मत करो मेरे छोटे-छोटे पौत्र-पौत्री हैं, जो डर रहे हैं मर जायेंगे।
केस दर्ज करने की दी धमकी
उस दौरान मैंने थानेदार से कहा कि मेरा एक पोता ट्यूशन गया हुआ है, वह घर अकेला जायेगा तो रो-रोकर मर जाएगा। मैं उसको लेकर आपके पास आ जाऊंगी तो पवनवीर ने कहा कि इस बात को किसी को मत बताना और अपने पोते को ट्यूशन से लेकर सीधी चौकी आ जाना। अगर इस बात के बारे में किसी को बताया तो तेरे व तेरे पति के खिलाफ ऐसा मुकदमा बनाऊंगा की सारी उम्र जेल में सड़ते रहोगे। मैं डर के मारे यह कह कर आ गई कि मेरे पति को मत मारना और पौत्री व पौत्र को कुछ मत कहना। मैं अपने पौत्र को ट्यूशन से लेकर आपके पास आ जाऊंगी।
कोई महिला कर्मचारी नहीं थी चौकी में
उस दौरान चौकी में मेरी सलवार का नाड़ा टूटने के बाद मैंने अपनी सिर की चुन्नी को फाड़ कर नाड़ा बनाकर सलवार में बांधा और अपनी इज्जत बचाई। इस दौरान चौकी में कोई महिला पुलिस कर्मी मौजूद नहीं थी।
चौकी से निकलकर बेटी और बेटे को फोन कर दी सूचना
जब मैं जाने लगी तो पवनवीर ने अपने साथी अनिल से कहा कि कि इसके साथ गांव में जा और इस मार-पिटाई के बारे में किसी को बताती है या वापस नहीं आती है तो इसको वहीं से पीटते हुए लाना। जिसे अनिल ने कहा कि शाम का समय है, किसी लेडीज पुलिस को बुला लो मैं नहीं जाऊंगा। वैसे ही हमने इसके बच्चों व पति को रोक रखा है, यह अपने आप वापस आयेगी। वहां से निकलते ही मैंने अपनी बेटी को फोन द्वारा अपनी सारी बातें बताई। फिर अपने बेटे को बताया जोकि ड्यूटी पर था। मेरे बच्चों ने कहा कि आप मेडिकल पहुंचो और अपना मेडिकल कराओ। जिसके बाद मेरा दामाद मुझे मेडिकल लेकर गया। जहां पर पवनवीर और सिविल कपड़ों में उसके दो-तीन साथी वहां आए और उन्होंने कहा कि तेरे से क्या कहा था, किसी को कुछ नहीं बताना। तुझे पुलिस चौकी ही आना है, अब देख मैं पुलिस कहर दिखाता हूं। इसके बाद वो वहां से चले गए।
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इन धाराओं में इन पुलिस कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज
पीड़िता के द्वारा पांच दिसंबर को दायर इस्तगासे पर सुनवाई करते हुए अदालत ने चौकी इंचार्ज सहित सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए। नौ दिसंबर को थाने में पहुंची डाक के बाद झज्जर थाना पुलिस ने अपनी दुजाना चौकी के तत्कालीन चौकी इंचार्ज पवनवीर के अलावा एएसआई अनिल कुमार, एएसआई नरेश कुमार, मुंशी हरीश कुमार, हेड कांस्टेबल प्रवीन कुमार, सिपाही यशविंद्र कुमार व रविंद्र कुमार के खिलाफ धारा 294, 323, 34 आईपीसी, 354, 354बी, 506 और एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अधिवक्ता प्रदीप मलिक के अनुसार धाराओं का मतलब
294- अश्लील हरकत
323- मारपिटाई
354- महिला के साथ छेड़छाड़
354बी- हमला करके महिला के कपड़े फाड़ना
506- जान से मारने की धमकी

डीएसपी अजमेर से सीधी बातचीत
सवाल : कोर्ट के आदेश पर दुजाना चौकी में तैनात सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, गिरफ्तारी कब होगी?
जवाब : पहले मामले की जांच की जाएगी।
सवाल : मामला एएसआई रैंक वाले अधिकारी के खिलाफ दर्ज हुआ है तो जांच कौन करेगा?
जवाब : हवलदार भी कर सकता है, वो केवल आईओ होना चाहिए।
सवाल : पीड़ित परिवार क्या कोर्ट से पहले आपके पास नहीं आया?
जवाब : परिवार के खिलाफ भी मामला दर्ज है और उन्होंने इस तरह की शिकायत नहीं दी।
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