चरखी दादरी। किसानों का भुगतान किए बिना शहर छोड़कर भागे आढ़ती रोशनलाल से बुधवार को पुलिस ने 70 लाख की नकदी और बरामद की है। आरोपी की निशानदेही पर यह राशि महम में आढ़ती के किसी रिश्तेदार से बरामद की गई है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। पुलिस पूछताछ में आढ़ती रोशनलाल ने बताया कि उसके कारोबार में लगातार घाटा हो रहा था इसी वजह से उसने यह पूरा खेल रचा।
सीआईए पुलिस टीम इंचार्ज दिलबाग सिंह ने बताया कि आढ़ती ने पुलिस को यह भी बताया कि किसान उसे ब्याज पर राशि देने के लिए खुद ही उसके पास आते थे। वह डेढ़ रुपया प्रति सैकड़ा के हिसाब से किसानों से राशि लेता था। दिलबाग सिंह ने बताया कि बुधवार को पुलिस आढ़ती को साथ लेकर महम पहुंची और उसके रिश्तेदार के मकान पर पहुंचे। वहां मकान से पुलिस ने 70 लाख रुपया बरामद किया है। यह राशि आढ़ती रोशनलाल ने मकान में रखी थी।
सीआईए इंचार्ज ने बताया कि आढ़ती रोशनलाल के बैक खातों की भी जांच की गई है लेकिन बैक खाते खाली मिलेे हैं। उनमें पैसा नहीं मिला। पुलिस पूछताछ में आढ़ती ने यह भी स्वीकार किया है कि उसका कुछ लोगों और किसानों का करीब डेढ़ करोड़ रुपया बकाया है।
ज्ञात रहे कि एसआईटी मंगलवार को रोशनलाल को साथ लेकर दिल्ली के बुध विहार गई थी। करीब 10 लाख रुपये उसकी साली के बेटे से बरामद किए थे। रोशनलाल ने पुलिस गिरफ्त में आने से पहले गोरखपुर और उड़ीसा की हवाई यात्रा भी की है।
यह था मामला
13 जून को चरखी दादरी अनाज मंडी के दो फर्म संचालक किसानों से करोड़ों का अनाज खरीद भुगतान किए बिना ही शहर छोड़कर फरार हो गए थे। विभिन्न गांवों के किसानों ने जय दादा गुंसाई ट्रेडिंग कंपनी संचालक मनीष, निरंजन उर्फ गोल्डी, जगदीश व कृष्ण उर्फ केशु सहित किरोड़ीमल रामकुमार ट्रेडिंग कंपनी के संचालक रामनिवास और रोशनलाल के खिलाफ सिटी थाने में सात एफआईआर दर्ज करवाई थीं। एसआईटी इंचार्ज दिलबाग व सीटी पुलिस टीम ने आरोपी आढ़ती रोशनलाल को दिल्ली के फखरुद्दीन नगर से गिरफ्तार कर लिया था। आढ़ती रोशनलाल शहर छोड़कर दिल्ली चला गया था। वहां अपने एक रिश्तेदार के पास वह कुछ दिन रुका था।
किसानों ने चार करोड़ बकाया होने का किया था दावा
252 किसानों ने चार करोड़ 56 लाख का भुगतान बकाया होने के दावे मार्केट कमेटी कार्यालय में दर्ज करवा रखे थे। किसानों ने चार करोड़ 41 लाख की दस हजार क्विंटल सरसों, दो लाख 26 हजार का 130 क्विंटल गेहूं व दस लाख की 250 क्विंटल ग्वार का भुगतान न होने के दावें फर्मों द्वारा दी गई कच्ची पर्ची सहित दर्ज कराए थे।