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बाजारों में जुलूस निकाल करवाए बाजार बंद, दो घंटे रखा अंबेडकर चौक जाम

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एससी-एसटी एक्ट में किए गए बदलाव के विरोध में दलित संगठनों के द्वारा शहर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन से पूर्व दलित समाज के लोग समाज की अलग-अलग धर्मशालाओं में एकत्रित हुए। जहां से शहर के मुख्य बाजारों में जुलूस करते हुए निकले। प्रदर्शनकारी जहां से भी निकले, इन्होंने वहां पर बाजार को पूरी तरह से बंद करवा दिया। कुछ दुकानदारों ने प्रदर्शनकारियों के समझाने पर तो कुछ ने भीड़ के भय से दुकानें बंद की। प्रदर्शन करते हुए दलित समुदाय के लोग राव तुलाराम चौक पर पहुुंचे। जहां से प्रदर्शन करते हुए ये फिर से अंबेडकर चौक पर पहुंच गए। यहां इन्होंने चौक को करीब दो घंटे तक जाम रखा। वहीं, बीच-बीच में कुछ युवकों के द्वारा जबरदस्ती दुकानें बंद करवाने का प्रयास किया गया लेकिन पुलिस के द्वारा उन्हें ऐसा करने से रोका गया।
एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
अंबेडकर चौक पर जाम लगाए बैठे दलित समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए उनके नेताओं ने माइक से घोषणा करते हुए कहा कि वो अब डीसी को ज्ञापन सौंपने जाएंगे। जिसका वहां पर मौजूद युवाओं ने कड़ा विरोध किया। युवाओं ने कहा कि डीसी ज्ञापन लेने के लिए अंबेडकर चौक पर ही आएंगी। इसके करीब आधे घंटे तक मान-मनोव्वल का दौर चलता रहा। आखिरकार करीब एक बजे इन लोगों ने एसडीएम रोहित यादव को ज्ञापन सौंप दिया। ज्ञापन के बाद भी करीब 20 मिनट तक युवा हंगामा करते रहे लेकिन इसके बाद ये जटिया धर्मशाला में चले गए।
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एएसपी शशांक रहे पुलिस बल के साथ मुस्तैद
भारत बंद के आह्वान पर दलित संगठनों के द्वारा झज्जर के बाजार बंद करवाने के लिए जाने के दौरान एएसपी शशांक कुमार सावन पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे। जब अंबेडकर चौक पर कुछ युवाओं ने जबरदस्ती दुकानें बंद करवाने चाही वे खुद डंडा लेकर युवकों को खदेड़ने के लिए पहुंच गए। वहीं, पूरे प्रदर्शन के दौरान एएसपी खुद हाथ में डंडा लिए नजर आए।
बोले दलित नेता
दलित नेता रमेश वाल्मीकि ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी लड़ाई किसी जाति से नहीं है। बल्कि हम अपने हकों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि उनके समुदाय के लोगों पर आए दिन अत्याचार होते हैं। उनकी कोई सुनवाई नहीं होती और ऊपर से आरएसएस की दिशानिर्देशों पर चलने वाली केंद्र की बीजेपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस एक्ट को बचाने के लिए अपनी ठीक नीयत से इसकी पैरवी नहीं की। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट को कमजोर करने का फैसला दलितों के विरोध में दिया। सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट जनरल ही केस की पैरवी के लिए न्यायाधीश के सामने पेश नहीं हुए।
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वर्जन
भारत बंद के तहत झज्जर में प्रदर्शन शांतिपूर्वक निपट गया। कुछ युवकों ने दुकानें बंद करवाने का प्रयास किया था, जिन्हें समझा दिया गया। कानून व्यवस्था को बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है।
- शशांक कुमार सावन, एएसपी, झज्जर।
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