-फोटो 63 : खेतों में खड़ी गेहंू की फसल। संवाद
बहादुरगढ़। कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. सुनील कौशिक ने कहा कि किसान मौसम से चिंतित न हों बल्कि इस बार गेहूं व सरसों की फसल में लगातार सिंचाई करें। हालांकि उन्होंने नर्सरी व फलवृक्षों के लिए अतिरिक्त देखभाल करने की बात भी कही। इस बार दिसंबर के महीने में बारिश नहीं हुई है। ऐसे में किसानों को फसलों में सिंचाई करनी चाहिए।
यदि इस समय बारिश होती है तो वह फसलों के लिए काफी फायदेमंद है। तापमान कम होने से गेंहू व सरसों के तनों में फुटाव ज्यादा होगा जिस कारण पौधे में एक से अधिक बालियां आएंगी।
एसडीओ ने बताया कि देर से बोई गई गेंहू की फसल यदि 20 से 25 दिन की हो गई है तो वह भी बारिश के बाद अच्छी होगी। अब कुछ दिनों बाद खेत में नाइट्रोजन की शेष मात्रा का छिड़काव भी कर दें। ठंड के चलते किसानों को सरसों की फसल में चेपा की निरंतर निगरानी करते रहना है।
अधिक कीट पाए जाने पर रोगोर या क्यूनलफांस दो मिलीलीटर प्रति एक लीटर में मिलाकर छिड़काव करें। गोभीवर्गीय फसल में हीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक व टमाटर में फल छेदक से बचाव के लिए फीरोमोन प्रपंस को चार की मात्रा में प्रति एकड़ में लगाएं।
इस मौसम में पालक, धनिया व मेथी की बुवाई कर सकते हैं। पत्तों के लिए 20 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर सकते हैं।