बहादुरगढ़। उत्तम नगर में सिलिंडर फटने से हुए विस्फोट की आवाज दूर तक सुनाई दी। घरों में बैठे लोग दहल गए और घरों से बाहर निकल आए। संयोग से मकान में रहने वाले जयप्रकाश के परिवार के चार सदस्य मकान में नहीं थे वरना ये हादसा और बड़ा हो सकता था। विस्फोट के बाद पड़ोसी में गई जयप्रकाश की पत्नी तेजी से दौड़कर पहुंची, लेकिन जब तक सब तबाह हो चुका था। हादसे के बाद पूरा परिवार सदमे में है।
जिस मकान में सिलेंडर फटा, उसमें जितेंद्र का भाई जयप्रकाश भी रहता है। जितेंद्र और जयप्रकाश घटना के दौरान अपनी दुकान पर थे, जबकि जयप्रकाश की पत्नी पड़ोस में घर के बाहर थी। उनकी दो बेटियां ट्यूशन पढ़ने के लिए गई हुई थी। पूरा परिवार संयोग से मकान से बाहर था नहीं हो इस हादसे की गंभीरता और भयावाह हो सकती थी। सिलेंडर फटने की आवाज सुनकर जयप्रकाश की पत्नी तेजी के साथ दौड़ी। घर की छत टूटकर नीचे गिरी हुई थी। यह देखकर उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई और वहीं पर गिर गई। सूचना पति और जेठ को मिली तो वे मौके पर पहुंंचे। पड़ोसी भी अपने-अपने घरों से बाहर निकलें तो सभी के मुंह से एक ही बात निकल रही थी कि भगवान का शुक्र है... जयप्रकाश की पत्नी और बेटियां इस हादसे का शिकार होने से बच गई। पड़ोसी जयभगवान ने बताया कि जिस समय यह हादसा हुआ। सिलेंडर फटने की आवाज दूसरी कॉलोनियों में भी सुनाई दी। भयंकर आवाज सुनकर पड़ोस के लोग और नगर पार्षद अश्विनी शर्मा भी जितेंद्र के मकान की तरफ दौड़े। घटना के बाद से उक्त घर को देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। अभी सिलेंडर फटने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। गैस रिसाई की आशंंका जताई जा रही है। पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी है। मां-बेटी के शवों को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल में रखवाया गया है। मंगलवार को पोस्टमार्टम होगा।
मेरा तो सब कुछ उजड़ गया...
मेरा तो सब कुछ उजड़ गया। सोमवार की सायं उत्तम कॉलोनी में हुए दर्दनाक हादसे में अपनी पत्नी और एक बेटी को खोने के बाद जितेंद्र के मुंह से रोते-बिलखते हकेवल यही शब्द निकल रहे थे। वह बिलख-बिलख कर रो रहे थे। मोहल्ले के लोग उन्हें दिलासा दे रहे थे। हादसे के बाद सबके दिल में दहशत और आंसू थे।
सबसे पहले प्रियल को मलबे से निकाला
छोटी बच्ची प्रियल पर अधिक मलबा नहीं गिरा था। इसलिए पुलिस ने सबसे पहले उसको निकालकर नागरिक अस्पताल में पहुंचाया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया तो नागरिक अस्पताल में लोगों की काफी भीड़ लग गई। जितेंद्र ने बताया कि चारवी पाचंवी कक्षा में पढ़ती थी, जबकि प्रियल केजी कक्षा की छात्रा है। प्रियल जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। उसका इलाज पीजीआईएमएस रोहतक में चल रहा है। चारवी पढ़ाई में काफी होशियार थी और परिवार की लाडली थी।