स्वास्थ्य महकमा अपनी इमरजेंसी सेवाओं को लेकर कितना संजीदा है, इसका खुलासा उस समय हुआ, जब अमर उजाला टीम मंगलवार को नागरिक अस्पताल में से अज्ञात द्वारा दी गई सूचना पर पहुंची। टीम ने मौके पर पहुंचकर देखा कि इमरजेंसी के मरीज ढोने वाले स्ट्रेचर पर अस्पताल का पुराना रिकॉर्ड ढोया जा रहा था। रिकॉर्ड को स्टोर इंचार्ज बाबू महेंद्र के आदेशों पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पोस्टमार्टम रूम के आगे ले जाकर ढेर लगा रहे थे।
अमर उजाला टीम ने जब मौके पर पहुंचकर फोटो लिए तो उन्होंने अपने काम को तुरंत रोकते हुए स्ट्रेचर इमरजेंसी विभाग में पहुंचा दिया। वहीं टीम द्वारा फोटो लिए जाने की खबर लगते ही बाबू पोस्टमार्टम रूम के आगे पहुंच गए।
वहीं उन्होंने रिकॉर्ड नष्ट करने का पत्र भी दिखाया। जब उनसे अमर उजाला टीम ने जाना कि क्या इसमें इमरजेंसी के स्ट्रेचर पर रद्दी ढोने की बात भी लिखी है तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। वहीं जब मामले के बारे में टीम एमएस के पास टीम पहुंची तो उससे पहले ही वे सीएमओ डॉ. रमेश धनखड़ के पास पहुंच चुके थे।
ये मिले इमरजेंसी के हालात
स्ट्रेचर पर जब रिकॉर्ड ढोया जा रहा था तो अमर उजाला टीम ने इमरजेंसी विभाग का दौरा किया। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात नर्स से पूछा गया कि आपात विभाग में कितने स्ट्रेचर हैं तो उनका जवाब था कि तीन हैं।
जबकि मौके पर केवल एक ही स्ट्रेचर था। जब उन्हें दिखाया गया कि यहां केवल एक है तो उन्होंने बताया कि एक स्ट्रेचर कई बार गायनी विभाग में ले जाते हैं। वहीं तीसरे पर रद्दी ढोई जा रही थी। ऐसे हालात में अगर कोई हादसे में घायल आपात विभाग पहुंच जाता तो उन्हें स्ट्रेचर मिलने की गुंजाइश न के बराबर थी।
स्वास्थ्य विभाग ने उड़ाई नियमों की धज्जियां
स्मॉग का कहर देश की राजधानी दिल्ली के साथ आसपास के सभी प्रदेश पिछले माह झेल चुके हैं, लेकिन लोगों की सेहत का ख्याल रखने वाला स्वास्थ्य ठीक करने वाला महकमा ही लोगों की सेहत बिगाड़ने का काम कर रहा है।
मंगलवार को अस्पताल प्रशासन ने विभाग के आदेशों के अनुसार अल्ट्रासाउंड से संबंधित दो वर्ष से पुराना रिकॉर्ड नष्ट करना था, जिसे दबाने की बजाय विभाग के अधिकारियों के आदेशों पर कर्मचारियों ने इसे पोस्टमार्टम रूम के आगे ही ढेर लगाकर जला दिया। प्रदूषण को लेकर कुछ रोज पूर्व ही नोडल अधिकारी बनाए गए रोहतक के डीसी अतुल कुमार ने सभी अधिकारियों को प्रदूषण रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के आदेश दिए थे, जिसके बावजूद खुद सरकारी विभाग द्वारा खुले में अपने रिकॉर्ड को जलाया गया।
राशन कार्ड, बीपीएल सर्वे रजिस्टर भी जलाए
विभाग के कर्मचारियों द्वारा अल्ट्रासाउंड कक्ष के रिकॉर्ड के साथ वहां पर गुभाना गांव के किसी परिवार का राशन कार्ड, मातनहेल और अन्य कुछ गांवों में की गई बीपीएल सर्वे का रजिस्टर, दिव्यांग लोगों का कुछ रिकॉर्ड भी जलाया गया। ये रजिस्टर और राशन कार्ड और दिव्यांगों से संबंधित कागजात यहां तक कैसे पहुंचे, इसका किसी के पास जवाब नहीं मिला।
तसले में नहीं ढो सकते रिकॉर्ड : महेंद्र
जिस महेंद्र बाबू के कहने पर कर्मचारियों ने रिकॉर्ड स्ट्रेचर पर डालकर ढोया था, उससे जब इस बारे में सवाल किया गया तो उनका कहना था कि इतना रिकॉर्ड तसले में डालकर नहीं ढोया जा सकता। वहीं रिकॉर्ड को जलाने के बारे में जब उनसे पूूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये तो कर्मचारियों ने अपनी सहूलियत के लिए कर दिया।
मुझे मामले की जानकारी नहीं थी। अब मामला मेरे संज्ञान में आया है तो मैं इस मामले की जांच एमएस डॉ. गर्ग कराऊंगा। अगर ऐसा किया गया है तो वह गलत है।
डॉ. रमेश धनखड़, सीएमओ झज्जर
अगर रिकॉर्ड को जलाया गया है तो सीएमओ को नोटिस भेजा जाएगा। रिकॉर्ड को जलाने की बजाय दबाना चाहिए था। ऐसे खुले में सामान जलाकर प्रदूषण फैलाना गलत है।
निर्मल कश्यप, एक्सईएन, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड झज्जर