सिविल अस्पताल में सोमवार को दवा वितरण की व्यवस्था बिगड़ी रही। मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना में लगे दस फार्मासिस्ट को हटाने के बाद व्यवस्था संभालने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने ट्रेनिंग पर चल रही नर्सिंग स्टूडेंट्स को जिम्मेदारी सौंपी। व्यवस्था संभलने की बजाय और बिगड़ गई।
असल में उनको दवाओं का कोई ज्ञान ही नहीं था। काम इतने धीमे से हुआ कि मरीजों की लंबी कतार लग गई और एक-दो घंटे तक लाइन में लग कर दवा मिली। मरीजों ने कई बार हो हल्ला भी किया। सिविल अस्पताल में तीन दिन पहले तक दवा वितरण का जिम्मा मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना में लगे कर्मियों के कंधे पर था। 2 जनवरी को इन 10 कर्मियों को एकाएक हटा दिया गया।
तभी से दवा वितरण की व्यवस्था बिगड़ी हुई है। सोमवार को अवकाश के बाद अस्पताल खुला तो मरीजों की लाइन लग गई। यहां विभिन्न प्रकार के इलाज के लिए 1184 मरीज पहुंचे। पर्ची बनाने से लेकर डाक्टर से परामर्श लेन ओर बाद में अस्पताल से मुफ्त दवा लेने के लिए मरीजों की लंबी कतार लगी रही। दवा खिड़की से पांच में से 3 फार्मासिस्टों को हटाने के बाद दो फार्मासिस्ट ही बचे थे।
वो दवा दें या फिर दवा को रजिस्टर में दर्ज करें, इससे काम बढ़ गया। अस्पताल प्रबंधन ने मदद के लिए दो नर्सिंग स्टूडेंटस को दवा की खिड़ी पर तैनात कर दिया। समस्या यह रही कि उनको ज्ञान ही नहीं था कि कौन सी दवा किस प्रकार से देनी है और कहां पर रखी है।
वहां तैनात फार्मासिस्ट ने उनको कई बार समझाया भी, लेकिन वे पूरा दिन उलझन में रही और इससे व्यवस्था बिगड़ कर रह गई। मरीजों को दवा के लिए एक से दो घंटे तक लाइन में लग कर इंतजार करना पड़ा। महिला मरीजों की हालत तो इससे और खराब हो गई।
सिविल अस्पताल में आज मरीजों की भीड़ आम दिनों की बजाय ज्यादा थी। फार्मासिस्ट की ठेका अवधि पूरी होने पर ही उनको रिलिव किया गया था। व्यवस्था सुधारने के लिए अन्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। नर्सिंग की छात्राओं को दवाओं का ज्ञान हो, इसलिए उनको वहां लगाया गया है। एनके गर्ग, एसएमओ