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केएमपी पर मिट्टी के कटाव से रफ्तार हुई धीमी

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वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के तौर पर मशहूर कुंडली-मानेसर-पलवल की पोल पहली बारिश में ही खुल गई है। उद्घाटन के मात्र सात माह बाद ही केएमपी की हालत बदतर हो गई है। वहीं सावन की पहली बारिश में ही मिट्टी कटाव और जगह-जगह पर जलभराव की समस्या बन गई है। मानेसर से हरियाणा बॉर्डर के कुंडली तक यह एक्सप्रेस-वे 135 किलोमीटर लंबा है तथा लेवल के हिसाब में जमीन से करीब 12 फुट ऊंचा भी बनाया गया है। एक्सप्रेस-वे पर बादली के पास मिट्टी कटाव शुरू हो गया है। कई जगह पर मिट्टी कटाव हाईवे को छू गया, जिससे दुर्घटनाएं होने का अंदेशा बना है। कई जगह सड़क जमीन में धंसने का अंदेशा भी बना है। हाईवे के किनारे कई स्थानों पर मिट्टी कटाव से वाहनों की रफ्तार थमने लगी है। रेलिंग टूट गई है। इससे वाहन चालकों को हादसे का भय रहता है। केएमपी टोल प्लाजा पर रेलिंग टूटकर लटक रही है। केएमपी पर कई जगह पानी निकासी के प्रबंध नहीं है जबकि पत्थर भी दोनों तरफ शत प्रतिशत नहीं है। जहां पर पत्थर नहीं है वहां मिट्टी कटाव की समस्या ज्यादा बनी है। पानी भराव की समस्या भी केएमपी पर है।
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6400 करोड़ की लागत से तैयार
केएमपी को तैयार करने में केंद्र सरकार की ओर से 6400 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। पिछले वर्ष नवंबर माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केएमपी को सुगम हाईवे के तौर पर जनता को समर्पित किया तो वाहन चालकों ने भी राहत महसूस की क्योंकि इस एक्सप्रेस-वे का इंतजार 12 वर्षों से किया जा रहा था। भारी भरकम राशि खर्च करने और 12 साल तक निर्माण कार्य चलने के बाद भी वाहन चालकों को मौत का सफर करना पड़ रहा है।
लाइट की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं
केएमपी चालू हुए काफी दिन हो चुके हैं लेकिन इस पर सफर करना रात के समय खतरे से खाली नहीं है। लाइट की पर्याप्त व्यवस्था न होने के चलते बारिश के समय तो यह रोड किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकता है। ऊबड़-खाबड़ सड़क होने के कारण इस पर दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है। हाल ही में गत दिवस भी बादली के नजदीक बोलेरो गाड़ी व स्कूटी में भिड़ंत होने पर स्कूटी सवार की मौत हो गई थी। जबकि एक सप्ताह पहले दंपती की मौत हो गई थी।
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व्हाट्सएप ग्रुप जो भी फोटो वायरल हो रही है उस जगह को दोपहर में ही ठीक करवा दिया गया है। कंपनी के ठेकेदार को कहा गया है कि जहां कहीं भी बारिश की वजह से कटाव हुआ है उसको जल्द से जल्द ठीक करवाएं ताकि वाहन चालकों को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
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सुरेंद्र देशवाल, सीनियर मैनेजर, एचएसआईआईडीसी।
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