स्मॉग का कहर कम होने की बजाए बढ़ता ही जा रहा है। स्मॉग की वजह से अब लोगों को सांस लेने में तो दिक्कत हो रही है लेकिन इसके साथ-साथ आंखों में भी जलन की शिकायत आ रही है। एक्यूआई कम होने की बजाए बढ़ रहा है, जो कि चिंता का विषय है। दिवाली की आतिशबाजी को तीन दिन बीत जाने के बावजूद एक्यूआई बुधवार को 340 दर्ज किया गया है, जो कि बेहद खराब की श्रेणी की ओर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अगर एक-दो दिन में बूंदाबांदी नहीं हुई तो स्मॉग लोगों का जीना दुश्वार कर देगा। दिवाली पर की गई अंधाधुंध आतिशबाजी का असर अब साफ दिखाई दे रहा है।
ईएनटी विभाग में पहुंच रहे मरीज
आतिशबाजी की वजह से छाए स्मॉग के कारण लोग अस्पताल में पहुंच रहे हैं। अस्पताल में पहुंच रहे लोग आंखों में जलन की शिकायत बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग आंखों में बार-बार पानी आने व लाल पड़ने की समस्या से ग्रसित हो गए हैं। ईएनटी स्पेशलिस्ट से इलाज के लिए पहुंच रहे लोग बता रहे हैं कि शहर में खूब आतिशबाजी हुई है लेकिन अब प्रदूषण का स्तर असहनीय हो गया है। ऐसे में इस पर बैन लगना चाहिए।
स्मॉग से बचने के लिए काले चश्मे का प्रयोग करना चाहिए। आंखों के लाल होने, पानी बहने व जलन होने की समस्या लेकर मरीज अस्पताल में आ रहे हैं। ऐसे में चिकित्सकों द्वारा दिए जाने वाले दवा को ही आंखों में डालें। बिना चिकित्सक की सलाह के आंखों के लिए कोई दवा का प्रयोग न करें।
डॉ. नुपूर, ईएनटी स्पेशलिस्ट, झज्जर।
स्मॉग के चलते छोटे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत आती है। इससे बचने के लिए बच्चों को भीड़भाड़ वाले स्थान व प्रदूषण की अधिकता वाले क्षेत्र में साथ लेकर जाने से बचा जाए। सबसे अच्छा होगा कि बच्चों को घर पर ही रखा जाए।
डॉ. मुरारी, बाल रोग विशेषज्ञ, झज्जर।