धनतेरस के त्योहार पर बाजारों में बर्तन व ज्वेलर्स विक्रेताओं के यहां भीड़ नजर आई। हिंदू धर्म में धनतेरस के दिन नए बर्तन व सोने चांदी के आभूषण खरीदना शुभ माना जाता हैं। यही कारण है कि बर्तन विक्रेताओं की दुकान पर मेला लगा नजर आया। वहीं स्वर्णकारों के यहां भी भीड़ दिखाई दी। दिवाली से पहले बर्तन विक्रेताओं व स्वर्णकारों ने ग्राहकों की मांग के अनुसार समान विशेष रूप से मंगवाकर रखे। इस दौरान लोगों ने नए बर्तनों की जमकर खरीदारी की। जानकारी के अनुसार शहर में बर्तन का कारोबार 15 लाख रुपये का हुआ, वहीं आभूषण का कारोबार 33 लाख रुपये का रहा। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों से भी भारी संख्या में लोग खरीदारी करने पंहुचे, जिससे बाजारों में रौनक काफी दिखाई दी। दोपहर में लोगों की भारी भीड़ के चलते वाहनों को निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हरीपुरा स्थित स्वर्णकार घनश्याम वर्मा ने बताया कि धनतेरस पर्व के लिए उन्होंने विशेष तैयारी की थी। उन्होंने बताया कि इस दिन लोग चांदी के लक्ष्मी-गणेश के अलावा अपनी क्षमता के अनुसार स्वर्ण आभूषण खरीदते है। उन्होंने बताया कि चांदी के सिक्कों की भारी मांग रही।
प्लास्टिक के सामान की रही मांग
बर्तन विक्रेता सुरेश गाबा ने बताया कि ग्राहकों को नए बर्तन खरीदने में काफी उत्साह रहा। उन्होंने बताया कि झज्जर का बाजार ग्रामीण ग्राहकों पर ज्यादा निर्भर है। ग्रामीण ग्राहकों ने भी जमकर खरीदारी की। जगत नारायण, दीपक एवं चिंकी बत्रा ने बताया कि नए व पुराने बर्तनों के साथ प्लास्टिक के सामान की ज्यादा मांग रही। इसलिए उन्होंने आकर्षक डिजाइन के सामान को लाकर ग्राहकों की इच्छा को पूरा किया।
झाडू की रही विशेष डिमांड
किराना व्यापारी लाला भगतराम पंसारी के विनोद, अनिल गर्ग ने बताया कि झाड़ू की सबसे ज्यादा मांग रही, जिसकी हमने पहले से तैयारी कर रखी थी। मान्यता के अनुसार झाड़ू को मां लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है की झाड़ू खरीदने से घर से गरीबी जाती है और ऋण से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन झाड़ू खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है ।