सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की दो घंटे और फार्मासिस्टों की दिन भर की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई। इलाज के लिए अस्पतालों में आए मरीजों को परेशानी का समाना करना पड़ा। क्योंकि जिले के सभी चिकित्सक शुक्रवार को दो घंटे की हड़ताल पर रहेे। सुबह आठ बजे से 10 बजे तक हड़ताल की गई और उसके बाद काले बिल्ले लगाकर चिकित्सकों ने लोगों का इलाज शुरू किया। लेकिन फार्मासिस्ट हड़ताल पर होने के कारण मरीजों को दवाइयां नहीं मिल पाई। सामान्य अस्पताल झज्जर में इलाज के लिए आए मरीज दर्द से कराह रहे थे और चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे थे। एक तरफ मरीज अपने इलाज के लिए मजबूरी बता रहे थे तो दूसरी तरफ चिकित्सक यह बात कह रहे थे कि उनकी भी हड़ताल करने की कुछ मजबूरियां हैं। वहीं दूसरी ओर सामान्य अस्पताल में कार्यरत फार्मासिस्ट भी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। जिले के सरकारी अस्पतालों में 135 चिकित्सक कार्यरत हैं। केवल सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी चिकित्सक हड़ताल पर रहे और आपातकालीन सेवाओं में काम करने वाले चिकित्सकों ने भी काले बिल्ले लगाकर काम किया। वहीं फार्मासिस्टों ने धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एचसीएमएस के आह्वान पर जिले में चिकित्सकों ने दो घंटे की हड़ताल रख सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने की डिमांड की। चिकित्सकों का कहना है कि उनकी मांगे पिछले लंबे समय से लंबित पड़ी है और मुख्यमंत्री की तरफ से आश्वासन दिए जाने के बावजूद भी उन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है। अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए 2 घंटे की हड़ताल रखी है। अगर सरकार उनकी मांगों को अब भी पूरा नहीं करती है तो आने वाले समय में उन्हें आंदोलन को और तेज करने को मजबूर होना पड़ेगा। आज उन्होंने पेन डाउन स्ट्राइक कर मांगों को पूरा करने की डिमांड की है।
फर्श पर लेट गए मरीज
सामान्य अस्पताल के हालात सामान्य नहीं थे। मरीजों की हालात इतनी खराब थी कि वो फर्श पर लेटे हुए चिकित्सक के आने का इंतजार कर रहे थे। वहीं वरिष्ठ नागरिकों की बात करें तो दीवार का सहारा लेकर जमीन पर बैठे थे। सामान्य अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ी हुई नजर आई तो इस भीड़ को देखकर बीमार बच्चे रोने लगे। बच्चों के बीमारी के कारण लाल सुर्ख चेहरे उनकी बीमारी की हालत को बयान कर रहे थे। खेड़ी खातीवास की राधा ने बताया कि वह लगातार सात दिनों से मलेरिया से जूझ रही है। हालात इतनी खराब है कि ठीक से बोल भी नहीं पा रही है। लेकिन डाक्टर हड़ताल पर है।
हम मरीजों के इलाज के लिए आते हैं। उनको परेशान करना हमारा फर्ज नहीं है। लेकिन हमारी भी कुछ मजबूरियां हैं कि हमें हड़ताल करने को मजबूर होना पड़ा। दो घंटे के बाद काम सामान्य रूप से सभी चिकित्सकों ने किया है।
डॉ. कुलदीप, प्रधान एचसीएमएस, झज्जर।