-फोटो 55 : रामनवमी पर प्रसाद ग्रहण करती कंजक। संवाद
बहादुरगढ़। चैत्र नवरात्रों के दौरान रविवार को रामनवमी पर मां सिद्धीरात्री की पूजा अर्चना हुई। कॉलोनियों में घरों व मंदिरों ने मां के जयकारे गूंजते रहे। व्रतधारियों ने कंजकों (कन्याओं) का पूजन कर उन्हें खाना खिलाकर प्रसाद वितरित किया। इसके बाद व्रत खोला। सुबह सवेरे ही कन्याओं को भोजन कराने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मची रही।
कंजक गिनती भर की, मगर उन्हें भोजन करवाने के लिए ले जाने वाले अधिक। रामनवमी की सुबह यह नजारा शहर व ग्रामीण क्षेत्र की अधिकतर गलियों का था। भक्तों द्वारा अष्टïमी पर ही व्रत खोलने की परंपरा निभा ली गई थी। वहीं काफी भक्त नवमी के दिन कन्याओं को भोजन खिलाकर व्रत खोला। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के वार्डों व मोहल्लों में नवमी पर देवी भक्तों ने मां सिद्धीरात्री की विधिवित तरीके से पूजा-अर्चना की। इसके बाद कंजकों को भोजन करवा कर व्रत खोलने की पर परा निभाई। इस परंपरा के निर्वहन में देवी भक्तों को जितनी मुश्किल हुई, उतनी तो शायद उन्हें देवी के नवरात्र करने में भी नहीं हुई होगी। व्रत दौरान तो भूखा रह कर देवी के सुमिरन में भक्तों ने आराम से अपना समय बिता लिया। मगर कई भक्तों को व्रत खोलने की पर परा निभाने के लिए 8-9 कंजकों की व्यवस्था करने में ही काफी समय लगा। देवी का स्वरूप मानी जाने वाली कन्याओं को ढूंढने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि देवी भक्त सुबह सवेरे ही कन्याओं को भोजन का न्योता देने के लिए आस पड़ोस के घरों के चक्कर लगाने लग गए थे।
-फोटो 55 : रामनवमी पर प्रसाद ग्रहण करती कंजक। संवाद