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Jhajjar-Bahadurgarh News: प्राकृतिक रंगों के साथ मनाएं होली का त्योहार

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-फोटो 84 : यशांक वासन
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बहादुरगढ़। होली हमारी संस्कृति से जुड़ा त्योहार है। इस पावन पर्व पर बहुत से लोग जल का दुरुपयोग करते हैं। रसायन युक्त रंगों का इस्तेमाल करते हैं। कई संस्थाओं की ओर से फूलों की होली मनाने की भी परंपरा बढ़ी है। पर्यावरण संरक्षण में जुटे लोग कहते हैं कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है कि हम प्राकृतिक रंगों से होली खेलें।
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नागरिक पर्यावरण संरक्षण का ख्याल रखें। कुछ लोग होली के धार्मिक व संस्कृति महत्व को नहीं समझते। मैं हर पर्व, त्योहार पर देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करता हूं। एक-दूसरे को चंदन का तिलक लगाकर होली मनानी चाहिए। साथ ही पानी का बचाव करना चाहिए।
यशांक वासन, रियल एस्टेट व्यवसायी



होली भाईचारे का संदेश देती है। फिर भी कई बार लगता है कि लोग होली के महत्व को नहीं समझते और नशा करके हुड़दंग मचाते हैं। हमें होली पर इन सब बातों का ख्याल रखना चाहिए। ऐसे ढंग से होली मनानी चाहिए जिससे वातावरण भी प्रदूषित न हो और त्योहार का मजा भी आए।
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सुनील रोहिल्ला, एचएल सिटी निवासी



होली पर कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के प्रयास सराहनीय है। मंदिरों में सामूहिक होली मनाई जाती है। सब लोग मिलकर होली मनाते हैं, अच्छा लगता है। हम सब रसायन युक्त लोगों से दूर रहें। प्राकृतिक रंगों को महत्व दें।
जगदीश एलाबादी, व्यापारी



ने कहा कि होली भाईचारे का त्योहार है। हम इस मौके पर पानी की बर्बादी न करें। पानी की एक-एक बूंद कीमती है। पानी के साथ ही सेहत का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। हम सब प्राकृतिक रंगों से होली खेलें। रिश्तेदार और सगे संबंधियों में मिठाइयां बांटे।
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नवीन मल्होत्रा, उद्यमी

-फोटो 84 : यशांक वासन

-फोटो 84 : यशांक वासन

-फोटो 84 : यशांक वासन

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