बहादुरगढ़। कैंसर शब्द सुनकर ही होश उड़ने लगते हैं लेकिन अगर सही इलाज, हौसला, परिवार का साथ और सकारात्मक सोच हो तो इंसान कैंसर जैसी बीमारी को भी हरा सकता है। ऐसे काफी लोग हैं जो कैंसर को हराकर न सिर्फ सामान्य जीवन जी रहे हैं बल्कि कैंसर पीड़ितों को जागरूक भी कर रहे हैं।
निजामपुर रोड निवासी कप्तान सिंह पेशे से किसान हैं। वह बताते हैं, 20 साल पहले उन्हें पता चला कि उन्हें कैंसर है। तब ऐसा लगा कि जिंदगी बदल गई है लेकिन हौसला नहीं खोया। परिजनों का साथ मिला और बीमारी का इलाज कराया। तब कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी हुई। दवाइयां खाईं। खान-पान में सुधार किया और बीमारी खत्म हो गई। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।
इच्छाशक्ति से सब आसान हो गया
नई बस्ती निवासी कृष्ण कुमार ठेकेदारी करते हैं। चार साल पहले उन्हें गले के कैंसर का पता चला। एक बार तो वे बहुत कमजोर पड़ गए। फिर सही होने की इच्छाशक्ति जागी। खानपान और दिनचर्या में बदलाव किया। इलाज कराया। फिर सब आसान होता चला गया। साल भर तक इलाज कराया। अब वे पूरी तरह ठीक हैं।
दिनचर्या और प्रदूषण भी जिम्मेदार : डॉ. नवीन
बाढ़सा एनसीआई के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. नवीन कुमार बताते हैं, कैंसर के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार दिनचर्या, गलत खानपान और प्रदूषण है। खानपान का ध्यान रखें। कोई दिक्कत हो तो जांच कराएं। शुरुआती स्टेज पर अगर कैंसर का पता चल जाए तो उससे इलाज आसान होता है। कैंसर को लेकर किसी तरह भी घबराएं नहीं। कैंसर का इलाज संभव है और तमाम लोगों ने सही इलाज से कैंसर की जंग को जीता है। सही जांच और बेहतर इलाज आवश्यक है। इतना कर लिया तो कैंसर ठीक हो जाएगा।