बहादुरगढ़। धूम्रपान के दौरान धुएं के छल्ले हड्डियों को कमजोर कर रहे हैं। इससे कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जिससे हड्डी टूट सकती है। ये कैल्सीटोनिक हार्मोन को बाधित करता है जो हमारी हड्डियों को बनाने में सहायक होते हैं। धूम्रपान के कारण हड्डियों की सघनता, गुणवत्ता प्रभावित होती है।
नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल बताते हैं कि युवा व्यस्क तेजी से धूम्रपान करने के आदी बन रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग चैन स्मोकर तक बन जाते हैं। यदि ऐसे लोगों में फ्रैक्चर होता है तो समस्याएं बढ़ जाती हैं। हड्डी रोग विभाग में आ रहे मरीजों में धूम्रपान करने वालों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। हालांकि पूछताछ में अधिकतम मरीज साफ मना कर देते हैं, लेकिन उपचार के दौरान जब रोग के ठीक होने में देरी होती है या समस्या बढ़ जाती है तो इसका पता चलता है।
ऑपरेशन के बाद हड्डी जुड़ने में लगता है काफी समय
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल ने बताया कि धूम्रपान करने वाले मरीजों में बेहतर तरीके से ऑपरेशन करने के बाद भी हड्डी जुड़ने में काफी समय लगता है। धूम्रपान के कारण हड्डी की गुणवत्ता खराब होती है। इसके अलावा अन्य समस्याएं भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि मरीजों को पूरी तरह से धूम्रपान छोड़ने को कहा जाता है, लेकिन देखा गया है कि अधिकतम लोग छोड़ते ही नहीं हैं।
धूम्रपान करता है समस्या
- धूम्रपान कैल्सीटोनिक हार्मोन को बाधित करता है, जो हड्डियों का निर्माण करता है।
- धूम्रपान करने से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है, रक्त की आपूर्ति को बाधित करता है जिससे फ्रैक्चर होता है।
- निकोटिन और फ्री-रेडिकल्स हड्डियों को बनाने वाली ऑस्टियोब्लास्ट कोशिकाओं को मारते हैं।
- धूम्रपान हार्मों कोर्टिसोल को बढ़ाता है, जिससे हड्डी टूट जाती है।
धूम्रपान से हो रही समस्याएं
ऑस्टियोआर्थराइटिस, जोड़ों में दर्द, जोड़ों को नुकसान होना, गठिया के इलाज का प्रभाव कम होना, पैरों और नसों में सूजन।