नूना माजरा-टांडाहेड़ी मार्ग पर 220 केवी पावर हाउस के नजदीक विस्फोटक बम मिलने से सनसनी फैल गई। छुट्टी पर घर आए सीआरपीएफ के एक एएसआई की सूचना पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे।
गुड़गांव से आए बम निरोधक दस्ते ने सारे सामान की जांच के बाद बमों को निष्क्रिय किया। पुराने होने की वजह से ये बम काफी हद तक खराब हो गए थे। इससे पहले पुलिस में हड़कंप मचा रहा।
220 केवी पावर हाउस नूना माजरा से मात्र दस मीटर दूरी पर दो हैंड ग्रेनेड, काफी संख्या में डेटोनेटर व फ्यूज आदि विस्फोटक सामग्री देखकर लोग दंग रह गए। लग रहा था कि ये खतरनाक सामग्री किसी मकसद से जुटाई गई थी, मगर किन्हीं कारणों से इनका प्रयोग नहीं हो सका।
सभी बम ग्रेेनेड-36 टाइप के थे। इन पर जंग लगा था। उन पर क्लिप भी थी। गांव के निवासी व सीआरपीएफ जम्मू में एएसआई धर्मवीर जून ने बताया कि खेतों में घूमते वक्त चरवाहों ने उन्हें ये बम दिखाए तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया। थाना सदर प्रभारी बिजेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। डीएसपी कप्तान सिंह भी आए। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने यहां रेत से भरे कट्टे लगा दिए।
गुड़गांव से आई टीम
रोहतक का बम निरोधक दस्ता राज्यपाल के कार्यक्रम में तैनात था। इसलिए गुड़गांव से बम निरोधक दस्ता आया। करीब अढ़ाई घंटे तक पुलिस विस्फोटकों के चारों तरफ पहरा देती रही।
दस सदसीय टीम ने बमों की जांच के लिए खोजी कुत्ते टाइगर की मदद भी ली। टीम के इंचार्ज राकेश व प्रताप सिंह ने इन बमों निष्क्रिय कर दिया। उन्होंने बताया कि ये हैंड ग्रेनेड कहीं बाहर से लाकर यहां डाले गए थे। किसी सिविलियन का इसमें हाथ नजर नहीं आता। आशंका जताई कि कोई आर्मी पर्सन इसे लेकर आया होगा।
30 मीटर मारक क्षमता
सही हालत में होते तो ये हैंड ग्रेनेड 30 मीटर क्षेत्र में नुकसान पहुंचा सकते थे। इस तरह के ग्रेनेड को खनन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बम निरोधक दस्ते के अनुसार जिस समय ये डाले गए, उस समय यदि यहां विस्फोट होता तो काफी बड़ा नुकसान हो सकता था। क्योंकि इसके साथ में 220 केवी का बिजली घर भी था।
चिंगारी से मचा हड़कंप
जिस स्थान पर नाले के साथ हैंड ग्रेनेड, डेटोनेटर, वायर व अन्य विस्फोटक सामान मिला, उसके ऊपर से ही हाई वोल्टेज की लाइन है। यहां लगे एक टावर से चिंगारी निकली, जिस कारण जमीन पर पड़े घास-फूंस में आग लग गई।
आग वहीं लगी, जहां ग्रेनेड पड़े थे। आग को बुझाने के लिए तुरंत पुलिसकर्मी दौड़े। एहतियात के तौर पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी तक मौजूद नहीं थी। यदि ग्रेनेड तक आग पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था।