बेरी। माता भीमेश्वरी देवी मंदिर बेरी के कपाट सुबह आरती के साथ ही भक्तों के लिए खोले गए। मंगलवार को अष्टमी के दिन 30 हजार श्रद्धालुओं ने कोरोना बचाव के लिए जारी किए गए नियमों का पालन करते हुए मां के दरबार में माथा टेककर आशीर्वाद लिया और मन्नत मांगी। प्रशासन की ओर से दर्शन करने के लिए टोकन व्यवस्था की गई थी। सुबह सवा 5 बजे आदिशक्ति जगत जननी मां भीमेश्वरी देवी के स्थान बदलने के लिए शान से सवारी निकाली गई। इस दौरान घंटों के नाद के साथ चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने मां के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। करीब पांच मिनट के बाद बाहर वाले मंदिर में मां की प्रतिमा के प्रवेश करने के साथ ही जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी। इस दिन सुबह से दोपहर तक हवन यज्ञ कर व्रत रखने वालों ने मां की पूजा की। इसके बाद भक्तों ने कन्या भोज करवाकर अपना व्रत खोला। ऑल ओवर इंचार्ज एसडीएम रविंद्र कुमार मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे से कंट्रोल रूम में नजर बनाए हुए थे।
महागौरी रूप की पूजा-अर्चना की
आचार्य जयप्रकाश वत्स ने बताया कि मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। नवरात्र के आठवें दिन इनकी पूजा का विधान है। इनका वर्ण पूर्णत गौर है। इसकी उपमा शंख चंद्र और कुंद के फूल से की गई है। इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि हैं। अपने पार्वती रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसके कारण शरीर एक दम काला पड़ गया था, तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा। इनकी उपासना से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते है। भविष्य में पाप-संताप, दैन्य दुख उसके पास कभी नहीं आते। मां महागौरी का ध्यान सार्वधिक कल्याणकारी है।
जमकर की खरीदारी
माता भीमेश्वरी देवी के मंदिर में अष्टमी के दिन दर्शन के लिए आए भक्तों ने अपने बच्चों के लिए खिलौने आदि की जमकर खरीदारी की। वहीं महिलाओं ने श्रृगांर व घरेलू सामान की भी खरीदारी की। महिलाएं अपने परिजनों के साथ मगंल गीत गाते हुए माता के दर्शन लिए मंदिर में पहुंची।
मां भीमेश्वरी मंदिर की मान्यता
जब कौरव पांडवों का युद्ध कुरुक्षेत्र में चल रहा था तो भगवान कृष्ण ने भीम को अपनी कुल देवी मां से युद्ध में विजयश्री का आशीर्वाद लेने के लिए भेजा था। भीम ने मां को अपने साथ चलने को कहा, लेकिन मां ने कहा कि भीम को उन्हें अपनी गोद में ले जाना पड़ेगा। रास्ते में जहां भी उतारेंगे वहां से आगे नहीं जाऊंगी। भीम ने मां की शर्त मान ली वह मां को अपनी गोद में उठाकर कुरुक्षेत्र युद्ध भूमि की तरफ चल पड़ा। जब भीम मां को लेकर बेरी कस्बे से गुजर रहा था तब भीम को लघुशंका के लिए मां को अपने कंधे से उतारना पड़ा। वह वापस मां को अपनी गोद में उठाने लगा तो मां ने भीम को अपनी शर्त याद दिलवाई फिर भीम ने मां की पूजा अर्चना कर बेरी कस्बेे के बाहर उन्हें स्थापित कर दिया, तभी से मां को भीमेश्वरी देवी के नाम से जाना जाता है।
मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में अष्टमी के दिन 30 श्रद्धालुओं ने सोशल डिस्टेंस के साथ मां के दरबार में माथा टेका। अष्टमी के दिन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंस व मास्क लगाने के लिए समय-समय पर अधिकारियों व कर्मचारियों की ओर से जागरूक किया जा रहा था।
- रविंद्र कुमार, एसडीएम, बेरी।
नवरात्रों के चलते मां भीमेश्वरी देवी में अष्टमी के दिन शांतिपूर्ण ढग़ से सपन्न हो गया और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो इसके लिए जगह-जगह पुलिसकर्मी तैनात थे।
- अनिल कुमार, शहर चौकी इंचार्ज, बेरी।