बहादुरगढ़। बहादुरगढ़ की हवा जहरीली हो चुकी है। लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। रविवार को देश में बहादुरगढ़ प्रदूषण के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। शहर का एक्यूआई 371 दर्ज किया गया है।
रविवार सुबह के समय स्मॉग छाया और लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ा। वहीं, नगर परिषद की ओर से शहर में सड़कों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 27 और 28 अक्तूबर को बारिश हो सकती है। बारिश से प्रदूषण का स्तर कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।
बहादुरगढ़ में एक्यूआई सुबह के समय 8 बजे 380 और शाम को 371 दर्ज हुआ। अभी हवाओं का सुस्त पड़ना प्रदूषण बढ़ने का कारण है। हवा चलती चलने पर प्रदूषण कम होगा। संभावना जताई जा रही है कि छठ पर्व के समापन पर आतिशबाजी होगी और प्रदूषण का स्तर 400 के पार हो सकता है। चिकित्सक लोगों को इस मौसम में प्रदूषण से बचने की सलाह दे रहे हैं।
बता दें कि वर्ष 2020 में अक्तूबर माह में 8 दिन एक्यूआई रेड जोन में और एक दिन 400 से ऊपर दर्ज हुआ था। अभी हालात इसी तरह के बने हुए हैं। हफ्ते भर से प्रदूषण रेड जोन में है।
कौन सा प्रदूषण कितना नुकसान पहुंचाता है...
पीएम10 : यह दस माइक्रोमीटर साइज तक के कण हैं। जब इनका स्तर अधिक हो जाता है तो लोगों को एलर्जी, सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी, अस्थमा, आंखों में जलन, सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। आमतौर पर सांस के साथ नाक इन्हें अंदर जाने से रोक लेती है।
पीएम 2.5 : 2.5 माइक्रोमीटर साइज तक के यह कण सांस के साथ शरीर में गहराई तक चले जाते हैं और अंगों को प्रभावित करते हैं। इससे जकड़न, चक्कर आना, थकावट, चिड़चिड़ापन जैसी समस्या भी हो सकती हैं। इससे बच्चों का विकास प्रभावित होता है।
एसओ2 : हवा में सल्फर डायऑक्साइड का स्तर बढ़ने से फेफड़ों का फंक्शन प्रभावित हो सकता है। आंखों में जलने और लाली के साथ कफ म्यूकस (बलगम) होने का खतरा रहता है। अस्थमा का खतरा भी बढ़ जाता है।
एनओ2 : यह गाड़ियों और इंडस्ट्रियों के धुएं से निकलता है। इसकी वजह से व्यक्ति के दिल पर असर होता है। बच्चों के फेफड़े कम काम करने लगते हैं व सांस संबंधित समस्या होने लगती है।
एनएच3 : आम बोलचाल में इसे अमोनिया कहा जाता है। इसका स्तर हवा में बढ़ने से व्यक्ति को आंखों व गले में जलन का अहसास होता है। गले के अंदरुनी हिस्से में सूजन की समस्या हो सकती है। सांस की नली में सूजन आ सकती है।
ओजोन : ओजोन का स्तर बढ़ने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इनमें छाती का दर्द, कफ, गले में खराश, छाती में जकड़न जैसी समस्या शामिल हैं।
सीओ : हवा में इस जहरीली गैस का स्तर बढ़ने से व्यक्ति को सिरदर्द, बेहोशी, कमजोरी, पेट से जुड़ी समस्या, उल्टी, छाती दर्द और भ्रम की समस्या भी हो सकती है।
-डॉ. सुंदरम, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़।
-फोटो 51 : बहादुरगढ़ में दिल्ली-रोहतक रोड पर पानी का छिड़काव करता टैंकर। संवाद