संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर बहादुरगढ़ के जूता उद्योग पर पड़ रहा है। शहर की एकमात्र लेदर शू फैक्टरी सुमंगलम का निर्यात करीब 50 प्रतिशत घट गया है। पहले फैक्टरी से 13 देशों में चमड़े के जूते भेजे जाते थे, लेकिन अब निर्यात केवल ऑस्ट्रेलिया तक सीमित रह गया है।
नुकसान की भरपाई के लिए फैक्टरी प्रबंधन ने घरेलू बाजार में बिक्री बढ़ाने पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। फुटवियर पार्क एसोसिएशन के वरिष्ठ उपप्रधान नरेंद्र छिकारा ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध से उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित हुए हैं। सुमंगलम फैक्टरी से बड़ी मात्रा में चमड़े के जूते विदेश भेजे जाते थे। निर्यात में आई कमी उद्योग के लिए चिंता का विषय है।
फैक्टरी में तैयार चमड़े के जूतों की विदेशों में मांग थी। जर्मनी, इटली, फिनलैंड, डेनमार्क, संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल सहित 13 देशों में जूतों का निर्यात होता था। फैक्टरी से हर साल करीब एक लाख जोड़ी जूते विदेश भेजे जाते थे। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होने से कई विदेशी बाजारों में आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा असर कारोबार पर पड़ा है।
घरेलू बाजार में बिक्री बढ़ाने पर जोर
फैक्टरी के मालिक राजीव बंसल और प्रबंधक अनिल ने बताया कि निर्यात में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। अब केवल ऑस्ट्रेलिया में निर्यात हो रहा है। ऐसे में कारोबार को संभालने और नुकसान कम करने के लिए घरेलू बाजार में बिक्री बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नॉन-लेदर फुटवियर का बड़ा केंद्र है बहादुरगढ़
बहादुरगढ़ देश के प्रमुख नॉन-लेदर फुटवियर केंद्रों में शामिल है। यहां करीब 2500 फुटवियर फैक्टरियां संचालित हैं। खबर के अनुसार देश का लगभग 63 प्रतिशत नॉन-लेदर फुटवियर यहां तैयार होता है और इन इकाइयों में प्रतिदिन करीब डेढ़ करोड़ जोड़ी फुटवियर का उत्पादन होता है। हालांकि, उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, पिछले कई महीनों से उत्पादन घटकर लगभग आधा रह गया है।
फोटो-53: बहादुरगढ़ की फैक्टरी में बने जूते देखता उद्यमी। संवाद