बादली। पराली को जलाने की बजाय उससे मुनाफा कमाने के सरकारी प्रयास रंग लाने लगे हैं। आमतौर पर धान की पराली को जलाकर नष्ट करने वाले किसान अब धीरे-धीरे जागरूक हो रहे हैं। किसान पराली को खेतों में जलाने की बजाय व्यापारियों को बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। राजस्थान गुजराज सहित कई राज्यों में इसकी काफी मांग है।
हरियाणा के धान की पराली अब दिल्ली, राजस्थान और गुजरात में भी बिक रही है। चावल, धान की तरह पराली का व्यापार भी लाखों में हो रहा है। राजस्थान के कुछ व्यापारी पराली के बंडल बनाकर बेच रहे है। किसान वेदवर्त, सोनू, संजय, प्रदीप और दीपक का कहना है कि उनका पराली बेचकर गेहूं की बिजाई करने का खर्च निकल गया है। पराली के व्यापारी इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा दो गुणा पराली का स्टाक कर रहे हैं। किसान अगर खेत में ही पराली बेचता है तो उसे 4000 से 5000 रुपये प्रति एकड़ मिल रहे हैं। किसान पराली को लेकर जागरूक होने लगा है। एक टन पराली में 5.50 किलो ग्राम नाईट्रोजन, 2.3 किलो फास्फोरस, 1.30 केजी सल्फर और 25 केजी पोटाश होता है। ऐसी खाद की कीमत बाजार में 5 हजार रूपए प्रति टन है। इसी का परिणाम है कि पराली से गैस प्लांट भी लगाए जा रहे हैं।
गोदाम बनाने के लिए सब्सिडी की मांग
पराली व्यापारी रणधीर, दीपक और कर्मबीर ने बताया कि पराली के बिकने से पहले उन्हें काफी डर बना रहता है। खरीदने के बाद खुले में पराली का स्टॉक लगा होता है। सूखी पराली में आग लगने का भय रहता है। बरसात से पराली भीगकर गली-सड़ी पराली से पूरा दाम नहीं मिलता है। सरकार को किसानों और व्यापारियों को गोदाम बनाने के लिए सब्सिडी दी जानी चाहिए।
इन चीजों में काम आती है पराली
पराली व्यापारी सूरजभान, भैयाराम, आकाश ने बताया कि राजस्थान में चारे के लिए बहुत डिमांड है। अन्य प्रदेशों में भी पराली सोफे बनाने, सेनेटरी सामान, टूटी, टायल, डिस्पोजल क्रॉकरी आदि कई सामान और पैकिंग में इस्तेमाल की जाती है। चारे में मिलाकर इसका प्रयोग मवेशियों के आहार में भी किया जाने लगा है।
-सुनील कौशिक, एसडीओ कृषि विभाग।