झज्जर। हरिपुरा मोहल्ला निवासी सुमित ने बताया कि उनका बेटा आरुष कक्षा सातवीं का छात्र है। बेटे का परिणाम आ चुका है और अब एक अप्रैल से कक्षाएं लगनी है। स्कूल ने बेटे की यूनिफॉर्म इस साल बदल दी। दो साल पहले भी यूनिफॉर्म में बदलाव किया गया था।
इस साल बेटे की यूनिफॉर्म लेने बाजार पहुंचे तो यूनिफॉर्म का रेट करीब 1500 रुपये बताया। शर्ट की जेब पर स्कूल का लोगो था। शर्ट कहीं बाहर मिल भी जाए तो बिना इस लोगो के शर्ट मान्य नहीं होगी। ऐसे में यूनिफॉर्म फिक्स दुकान से ही खरीदनी पड़ी। यह केवल एक उदाहरण है। अधिकांश स्कूलों की यही कहानी है।
नए सत्र की तैयारी के बीच स्कूल सिर्फ पुस्तक और स्टेशनरी से ही नहीं बल्कि बच्चों की यूनिफॉर्म से भी अभिभावकों को लूट कर उनकी जेब ढीली करा रहे हैं।स्कूल संचालकों ने किताबों से लेकर यूनिफॉर्म की दुकानें फिक्स कर रखी हैं। स्कूलों की तरफ से छोटे-छोटे बदलाव करके विशेष यूनिफॉर्म तैयार करवा ली है।
अभिभावक मजबूरी में फिक्स दुकानों से डेढ़ दो गुणा अधिक मूल्य पर इन्हें खरीदने को मजबूर हैं जबकि बाजार में इनसे मिलती-जुलती यूनिफॉर्म 30 से 40 प्रतिशत कम मूल्य पर उपलब्ध हैं। यही नहीं कई स्कूलों ने गर्मियों और सर्दियों के लिए अलग-अलग यूनिफॉर्म निर्धारित की हैं।
जिससे बजट छह से आठ हजार तक बढ़ जाता है। जिला शिक्षा अधिकारी रतिंदर सिंह का कहना है कि अभिभावक अपनी मर्जी से किसी दुकान से सामान ले सकते हैं। उनको बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि कोई शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
30 से 50 प्रतिशत तक अधिक हैं दाम
सामान्य स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की शर्ट 200 से 250 रुपये, पैंट 250 से 350 रुपये, टाई 25 से 70 रुपये, मोजे 50 रुपये, जूते 250 से 350 रुपये, टीशर्ट 150 से 200 रुपये में मिल जाती है। वहीं सर्दियों के लिए ब्लैजर एक हजार से 1200, आधी बाजू का स्वेटर 250 से 300 रुपये, गर्म ट्रैक सूट 350 से 400 रुपये, टोपी 80 से 120 रुपये में उपलब्ध हो जाती है लेकिन जब चिह्नित दुकान से खरीदा जा रहा है तो इनके दाम 30 से 50 प्रतिशत तक अधिक वसूले जा रहे हैं।
जूतों के नाम पर भी अवैध वसूली
बच्चों के जूते सामान्य रूप से 300 से 550 रुपये तक में आसानी से आ जाते हैं लेकिन स्कूलों ने निर्धारित ब्रांड का जूता लगाकर अभिभावकों पर अतिरिक्त वजन डाल दिया है। ऐसे में बच्चों के 8-9 नंबर का जूता भी 800 से एक हजार रुपये में मिल रहा है।