फोटो नंबर 71: आरा मशीन पर लकड़ी कटाई करते कारीगर। (संवाद)
बादली। एलपीजी गैस सिलिंडर की कमी के चलते लकड़ी की मांग तेजी से बढ़ रही है। स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो ग्रामीण इलाकों में भी लकड़ी की कमी हो सकती है। गांव में पहले से ईंधन के लिए लकड़ी का उपयोग होता रहा है लेकिन अब गैस की किल्लत के कारण अचानक मांग बढ़ी है।
आरा मशीन संचालकों के अनुसार गैस की कमी का सीधा असर लकड़ी बाजार पर दिखाई देने लगा है। पिछले 10 दिन में लकड़ी की उपलब्धता कम हुई है। लकड़ी के भाव जहां 650 रुपए प्रति क्विंटल थे, वहीं अब बढ़कर 1150 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि लकड़ी के अत्यधिक उपयोग से जंगलों पर दबाव बढ़ेगा।
भट्ठियां चालू होने से बढ़ी खपत
गैस की किल्लत होने से मिठाई व्यवसाय से जुड़े हलवाई अब गैस की जगह लकड़ी की भट्ठियों का सहारा लेने लगे हैं। हलवाई विकास कुमार और छोटा ने बताया कि पहले उनकी दुकान पर पूरा काम एलपीजी गैस भट्ठियों पर होता था लेकिन अब गैस सिलिंडर समय पर नहीं मिलने से उन्हें लकड़ी की भट्ठी पर काम करना पड़ रहा है। इससे काम करने में समय और मेहनत दोनों अधिक लग रहे है।
शहरों में भी बढ़ी मांग
आरा मशीन संचालक देवेंद्र और कला का कहना है कि पहले शहरों में लगभग हर घर में एलपीजी सिलिंडर से ही खाना पकता था लेकिन अब वहां भी लकड़ी की मांग बढ़ने लगी है। गैस की अनियमित आपूर्ति के चलते लोग वैकल्पिक ईंधन की तलाश कर रहे हैं। यदि लकड़ी की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो हरे पेड़ों की कटाई तेज हो सकती है।