कृषि कानूनों को लेकर बहादुरगढ़ और दिल्ली को जोड़ने वाले टीकरी बॉर्डर पर शनिवार को बहादुरगढ़ के बाईपास के नजदीक ठहरे पंजाब के एक युवा किसान की मौत हो गई। उसकी मौत हृदयाघात से हुई या फिर अन्य वजह से यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। सूचना मिलने पर सेक्टर-9 चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसके पिता के बयान दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम नागरिक अस्पताल में कराया और परिजनों के हवाले कर दिया।
पंजाब के जिला मुक्तसर साहिब के गांव भिटीवाला निवासी किसान बोहर सिंह (36) टीकरी बॉर्डर के आंदोलन में शुरुआत से ही किसान जत्थे में शामिल था। वह किसानों के साथ बहादुरगढ़ बाईपास पर सैनिक स्कूल के नजदीक ठहरा हुआ था। शुक्रवार की रात करीब 3 बजे तक उसने अपने गांव की ट्रॉली का पहरा दिया और उसके बाद सो गया। शनिवार की सुबह जब वह नहीं उठा तो उसे अन्य किसानों ने संभाला। उसे इलाज के लिए शहर के एक निजी अस्पताल में लेकर गए, जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सेक्टर-9 पुलिस चौकी इंचार्ज विनोद कुमार व जांच अधिकारी मुख्य सिपाही सुनील कुमार ने बताया कि मृतक के पिता कुलवंत के बयान दर्ज कर शव का नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया गया। युवा किसान बोहर सिंह 2 भाइयों में बड़ा और शादीशुदा था। उसका एक बेटा है। बता दें कि बहादुरगढ़ में धरनारत किसानों में से शुक्रवार को संगरूर के 83 वर्षीय किसान जगीर सिंह और मुक्तसर जिले के इकबाल सिंह की मौत हो गई थी। अभी तक टीकरी बॉर्डर पर 19 आंदोलनकारी किसानों की मौत हो चुकी है, जिनमें चार किसान अकेले मुक्तसर जिले के थे।
सिंघु बॉर्डर से लौटे अमलोह के किसान की मौत
पंजाब के अमलोह में सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन से अपने गांव सलाणी अमलोह में लौटे किसान भूपिंदर सिंह (50) की अचानक मौत हो गई है। वह शुक्रवार को अपने गांव लौटे थे। वह कई दिनों से सिंघु बार्डर पर किसान आंदोलन में हिस्सा ले हे थे। किसान भूपिंदर सिंह के पास आठ एकड़ जमीन है। उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी और एक बेटा है। किसान की मौत के बाद अमलोह हलके में शोक की लहर है और बड़ी संख्या में लोग उनके घर दुख बांटने पहुंचे।