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सूख रही धरती, पड़ रही दरारें

Mon, 11 Jul 2016 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ झज्जर / बहादुरगढ़
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Field - फोटो : Bureau
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बारिश न होने के कारण अब जमीन सूखने लगी हैं, वहीं जिन खेतों में धान बोई गई है वहां दरारें दिखाई देने लगी हैं। धान की रोपाई करने वाले किसान परेशान हैं और इंद्रदेव से बारिश की प्रार्थना कर रहे हैं।
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क्षेत्र में विभागीय आंकड़ों के अनुसार करीब 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर भूमि जुताई योग्य है। जिसमें से अब की बार कृषि विभाग द्वारा करीब 35 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की फसल रोपाई की बात कही गई है। अब तक के वर्षों में यह धान की फसल में बढ़त का एक बड़ा आंकड़ा रहा है। इस वर्ष मौसम विभाग द्वारा की गई भविष्यवाणी के हिसाब से धान की फसल रोपाई में 1000 से लेकर 1500 हेक्टेयर की वृद्धि मापी जा रही है। लेकिन मौसम विभाग की भविष्य वाणी के हिसाब से क्षेत्र में की गई ज्यादातर भूमि पर धान की रोपाई के कारण समय पर बारिश ना होने की वजह से किसानों के चेहरों पर साफ तौर से चिंता की लकीरें झलक रही हैं। क्षेत्र में खरीफ की फसल के रूप में किसानों के लिए धान की फसल एक वरदान साबित हेती आ रही है। लेकिन विगत कुछ वर्षों से घटती बारिश और बढ़ती बीमारियों की वजह से यही वरदान किसानों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है।

इस वर्ष मौसम विभाग ने तेज बारिश की भविष्यवाणी की थी। जिसके आधार पर कृषि अधिकारियों ने भी ज्यादातर भूमि पर धान की फसल रोपाई की ही सलाह दी थी। लेकिन अब किसान विशेष रुप से चिंतित हैं क्योंकि बारिश नहीं होने से उनकी खेती पिछड़ रही है। धान के खेतों में समय पर पानी ना आने की वजय से सूखे के कारण दरारें पड़नी शुरू हो गई हैं। सामान्य से अधिक बारिश की मौसम विभाग की भविष्यवाणी के बीच स्थिति यह है कि अब तक क्षेत्र में कहीं अच्छी बारिश नहीं हुई। मौसम की इस प्रकार की बेरुखी को देखते हुए हिम्मत बटोरकर खेती की तैयारी में जुटे किसानों की चिन्ता बढ़ती जा रही है। अगले तीन चार दिनों के मौसम पूर्वानुमानों में भी अच्छी बारिश के संकेत नहीं हैं।
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क्षेत्र में खरीफ मौसम की मुख्य फसल धान है, जिसमें सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता ज्यादा होती है।

लेकिन खेत्र में नहरी पानी कम होने की वजय से किसानों को ज्यादातर बारिश के भरोसे ही रहना पड़ता है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी सटीक नहीं उतरने से लोगों का भरोसा टूट रहा है। आश्चर्यजनक रुप से सरकार का कृषि विभाग अब तब मौन है। इन कुछ दिनों के मौसम के रुख से साफ होता जा रहा है कि अगर किसानों पर इंद्र देवता ने मेहरबानी नहीं बरपी तो खरीफ की मुख्य फसल धान का क्या हाल होगा। वैसे देखा जाए तो मौसम के हिसाब से बारिश के पंद्रह दिन निकल चुके हैं। अभी भी लोग उमस भरी गर्मी से परेशान हैं।

मौसम के हिसाब से बीज की सलाह भी बन सकती है खतरा
पिछले साल जिन किसानों की फसल खेत में ही सूख गई थी, उनकी मनोदशा मौसम के मौजूदा हाल को देखते हुए समझी जा सकती हैं। मौसम की मार अगर किसानों पर पड़ती है तो उसका असर उद्योग, व्यापार पर भी पड़ता है। अच्छी बारिश की भविष्यवाणी ने सबकी उम्मीदें बढ़ा दी थीं। हालांकि अब भी लोग मान रहे हैं कि मौसम मेहरबान होगा और आखिर तक उसके अनुकूल बने रहने से पैदावार प्रभावित नहीं होगी। कृषि विभाग मानसूनी बारिश की संभावनाओं के आधार पर अपनी तैयारी रखता है। जाहिर है कि उसने बीजों का चुनाव अच्छी बारिश के अनुमानों के आधार पर किया होगा। लेकिन अगर समयानुसार बारिश नहीं हुई तो कृषि विभाग का इस प्रकार का प्रयोग भी किसानों का साथ नहीं देगा।

नहरों से पूर्ण सिंचाई नहीं संभव
इस बारे में जानकारी देते हुए किसान रामकुवार, रमेश, हीरामल व रविंद्र आदि ने बताया कि खेत्र में नहरी पानी से धान की फसल की संपूर्ण सिंचाई करना संभव नहीं है। क्योंकि नहरी पानी महीने भर में एक बार ही आता है। जिससे धान की फसल को सींचना संभव नहीं है। उन्होने कहा कि ज्यादा ट्यूबवेल का भी प्रयोग नहीं कर सकते। क्योंकि क्षेत्र में जमीनी पानी काफी खारा हो चुका है। अगर फसल में ज्यादा जमीनी पानी का प्रयोग करेंगे तो फसल के साथ साथ जुताई योग्य भूमि के भी खराब होने के आसार बने रहते हैं।


धान की फसल के खेत में सूखे की वजय से दरार पड़ना किसान के लिए भारी समस्या है। इससे फसल को काफी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए किसान को इस प्रकार से अगेती फसल के लिए बारिश की बाट न देखकर किसी भी प्रकार से उक्त खेत में सिंचाई की व्यवस्था करनी जरूरी है। ताकि धान की फसल को किसी प्रकार को कोई नुकसान ना पहुंचे।
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-डॉक्टर सतवीर शर्मा, कृषि विशेषज्ञ
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