मौसम में लगातार हो रहे बदलाव ने फसलों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। गेहूं व सरसों पर चेपा रोग का हमला हुआ है। फरवरी माह में सरसों और गेहूं की फसल में बालियां आनी शुरू हो जाती हैं, जिससे चेपा के हमले से नुकसान की आशंका बढ़ गई है। तापमान में धीरे-धीरे हो रही बढ़ोतरी इस रोग के फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा की हैं। किसान चिंतित हैं, तो कृषि अधिकारी किसानों को स्प्रे की सलाह दे रहे हैं।
कृषि विभाग के अनुसार क्षेत्र में एक लाख साढे़ चार हजार हेक्टेयर भूमि में गेहूं व साढ़े तेतीस हजार हेक्टेयर भूमि में सरसों की फसल की बिजाई की गई है। फसल पकने के आखिरी पड़ाव पर है। लेकिन दिन प्रतिदिन बढ़ रही गर्मी ने बीमारियों की दस्तक दे दी है। किसान चितिंत दिखाई दे रहे हैं।
मुख्य रूप से चेपा नामक रोग ने फसलों को काफी प्रभावित किया है। जो कि गेहूं व सरसों की फसल में छोटे छोटे मच्छरों के रूप में दस्तक दे चुका हैं। इनकी संख्या अत्याधिक है। जिसके कारण फसल की पत्तियां सूख रही हैं। फसल को बर्बाद करने वाले इन मच्छरों को किसान अल यानी चेपा का ही रूप कह रहे हैं।
चेपा की बीमारी को गेहूं व सरसों की फसल में पहली बार देखा गया है। जिसको लेकर किसान दवाईयों का प्रयोग भी कर रहे हैं। लेकिन कोई खास प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा है। इसी प्रकार से इन छोटे छोटे मच्छरों के कारण सरसों की फसल में भी काफी नुकसान देखा जा रहा है।
चारों तरफ सरसों की फसल में पीले फूल लहरा रहे हैं। लेकिन अब पकने के आखिरी पड़ाव पर और चेपा रोग की दस्तक के कारण किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। सरसों की फसल में इस रोग के कारण पीले फूल सफेद पड़ रहे हैं और फिर सूख रहे हैं। गेहूं की हरी पत्तियां भी चेपा के कारण सफेद हो कर सूख रही हैं।
किसान सोमबीर ने बताया कि इस प्रकार की बीमारी गेहूं की फसल में पहली बार देखने को आई है। इसका किताना नुकसान किसान को झेलना पड़ेगा । ये तो फसल की झड़ाई पर ही पता चलेगा। किसान पद्म सिंह का कहना था कि बीमारी फसलों के लिए ही नहीं बल्कि वाहन चालकों के लिए भी समस्या पैदा कर रही है। इनकी संख्या अत्याधिक है जो कि ट्रैक्टर व बाइक सवार के लिए परेशानी बनी हुई है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ सुरेंद्र मलिक ने बताया कि अब की बार इस बीमारी का असर सारे प्रदेश में देखने को मिल रहा है। इसके लिए किसान कोई भी रस चूसने वाली दवाई का स्प्रे कर सकता है। या फिर प्रति एकड़ भूमि में 10 से 15 टंकी केवल पानी का स्प्रे करें। जिससे की फसल भीगने के कारण चेपा रोग से मुक्त हो जाएगी। रोबोर नामक दवाई का स्प्रे भी काफी हद तक चेपा से बचाव करता है।