कोरोना से लड़ रहे कमांडिंग ऑफिसर चेतन चीता
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आतंकवादी हमले में नौ गोलियां लगने के बाद जिंदगी की जंग जीत चुके केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कमांडिंग ऑफिसर चेतन चीता अब कोरोना से लड़ रहे हैं। संक्रमण के चलते वह बादली के बाढ़सा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में उपचाराधीन हैं। चिकित्सकों के अनुसार पहले के मुकाबले उनकी तबीयत में थोड़ा सुधार है, लेकिन वे अभी वेंटिलेटर पर हैं। अगले 24 घंटे चीता के लिए काफी अहम हैं।
बहादुरी के लिए कीर्ति चक्र विजेता चेतन चीता मूल रूप से राजस्थान के कोटा जिले के रहने वाले हैं। फिलहाल परिवार के साथ दिल्ली में रहते हैं। उनकी पोस्टिंग दिल्ली के नजफगढ़ सीआरपीएफ कैंप में है। कोरोना से संक्रमित होने की वजह से उन्हें बाढ़सा एम्स में भर्ती करवाया गया है।
जिस समय उन्हें एम्स में भर्ती करवाया गया था तो उनका ऑक्सीजन लेवल ऊपर नीचे हो रहा था। लेवल सामान्य से कम होने और स्वास्थ्य सुधार के लिए उन्हें अब वेंटिलेटर पर रखा गया है। चिकित्सक उनके स्वास्थ्य पर करीब से नजर रखे हुए हैं। स्वास्थ्य में पहले के मुकाबले सुधार भी हुआ है, लेकिन अभी चिंता बनी हुई है।
एम्स के संबंधित अधिकारियों की ओर से चेतन चीता को जरूरी चिकित्सा सहायता दी जा रही है। उनके ऑक्सीजन लेवल में सुधार है। एम्स बाढ़सा के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. एंजेल के अनुसार चेतन चीता के स्वास्थ्य पर वरिष्ठ चिकित्सक नजर रखे हुए हैं। अगले 24 घंटे चीता के लिए काफी अहम हैं, जोकि वेंटिलेटर की स्थिति से पता चलेगा। प्रशासन भी चीता के स्वास्थ्य की जानकारी ले रहा है। वहीं दिल्ली और राजस्थान के कोटा में चीता के ठीक होने की दुआएं हो रही हैं।
आतंकवादी हमले में लगी थी नौ गोलियां
जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा में सीआरपीएफ की आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान चेतन चीता को नौ गोलियां लगी थीं। 14 फरवरी 2017 को आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर पहुंचे सुरक्षाबलों के मूवमेंट की जानकारी आतंकियों को पहले ही हो गई थी। घात लगाकर बैठे आतंकियों की ओर से हुए हमले में चीता को नौ गोलियां लगी थीं, जिनमें एक उनकी गोली आंख में लगी थी। इसके बाद भी चीता ने घायल हालत में आतंकवादियों पर फायर किए। उस समय चेतन चीता करीब दो माह तक कोमा में रहने के बाद दिल्ली एम्स में स्वस्थ हुए थे।