क्षेत्र में गोहत्या व गोतस्करी के विरोध में चल रहा चक्का जाम 50 घंटे बाद सोमवार की दोपहर को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में खुलवा दिया गया।
पुलिस को जाम खुलवाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि दोपहर को संत गोपालदास ने बादली के गुड़गांव चौक पर अनशन जारी रखा, लेकिन शाम को वे दिल्ली रवाना हो गए।
संत गोपालदास ने कहा कि गोहत्या के खिलाफ सख्त कानून बनने तक उनका अनशन जारी रहेगा। उनके जाने के बाद पुलिस ने भी राहत की सांस ली।
बादली में सोमवार की सुबह से ही पुलिस बल के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया था। दोपहर तक भारी संख्या में पुलिस कर्मी बादली में पहुंच गए।
बादली पूरी तरह से छावनी में बदला नजर आया। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण जाम खोलने को तैयार नहीं हुए।
दोपहर तक ग्रामीणों को समझाने का सिलसिला चलता रहा। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल मंगवा लिया गया। पुलिस बल बढ़ता देख ग्रामीण एक-एक कर खिसकने शुरू हो गए।
हालांकि कुछ लोगों ने पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया, लेकिन बाद में उन्हें भी समझा लिया गया। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने के लिए ग्राम पंचायत का भी सहारा लिया।
पुलिस ने जाम पर बैठे लोगों को बताया कि उनकी पंचायत से बातचीत हो चुकी है और गोतस्करों को पकड़ने के लिए गश्त बढ़ा दी गई है।
जाम पर बैठे लोगों को संबोधित करते हुए नाहर सिंह ठेकेदार ने कहा कि हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है, जिसके विरोध में सख्त कानून बनाना चाहिए।
पुलिस ने भरोसा दिलाया कि गोतस्करों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके बाद जाम को पूरी तरह से खुलवाकर दो दिन से रुके पहियों को गति दे दी गई।
इस दौरान महिला पुलिस कर्मी भी मौजूद रहीं। जाम खुलवाने के वक्त डीएसपी शमशेर सिंह, अनूप सिंह, तहसीलदार सुशील कुमार आदि मौके पर मौजूद रहे।
गोपालदास को मनाने में जुटी पुलिस
जाम के दौरान संत गोपालदास को मनाने में पुलिस को काफी पसीना बहाना पड़ा। संत गोपालदास ने कहा कि केंद्र सरकार को गोहत्या रोकने के लिए सख्त कानून बनाने चाहिए।
दोषियों के लिए सख्त सजा सुनिश्चित की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बादली के बाद वो दिल्ली के संसद भवन पर अनशन शुरू करेंगे और फिर भी कानून नहीं बना तो गंगा में समाधि लगा लेंगे।
उन्होंने कहा कि जब तक पूरे प्रदेश में गोरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक वह बादली के लोगों को साथ लेकर आंदोलन जारी रखेंगे।
देर शाम को गोपालदास अपनी गाड़ी में बैठकर दिल्ली की ओर रवाना हो गए, लेकिन उन्होंने अन्न जल ग्रहण नहीं किया। उनके चले जाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली।
शनिवार की सुबह लगाया था जाम
शनिवार की सुबह बादली क्षेत्र में पांच गायों के अवशेष मिलने से गुस्साए लोगों ने क्षेत्र को चारों तरफ से जाम कर दिया था।
ग्रामीणों ने गोहत्यारों को पकड़ने की मांग को लेकर जाम लगाया था। ग्रामीणों ने गायों के अवशेष सड़क पर ही रखकर जाम लगा दिया। महिलाओं सड़क पर बैठकर गायों के अवशेष के सामने भजन भी गाए।
सप्लाई भी बंद रही
जाम की वजह से पूरे क्षेत्र में दूध, सब्जी व अन्य जरूरी चीजों की सप्लाई बंद हो गई थी। होटलों पर आटा और दूध तक नहीं बचा था।
क्षेत्र में एकमात्र रसोई गैस एजेंसी पर सिलेंडर नहीं मिले। दुकानों परे ताले लटके रहे। ईंट भट्टों की गाड़ियां जाम में खड़े होने से दिल्ली में भी ईंटों की सप्लाई नहीं हो सकी।
स्कूल और बैंक भी बंद
शनिवार को लगे जाम के बाद रविवार को तो छुट्टी का दिन था, लेकिन सोमवार को स्कूल व कॉलेज लगभग बंद ही रहे। बादली के स्कूल की तो छुट्टी करनी पड़ी।
एहतियात के तौर पर बैंकों को बंद करना पड़ा। छात्र कॉलेज में पहुंच पाए। सुबह अखबारों की गाड़ी भी जाम में फंसी रही। एक मोटे अनुमान के मुताबिक बादली के गोरक्षा आंदोलन की वजह से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।