15 दिन पहले टीकरी बॉर्डर पर ठंड लगने से बीमार हुए झज्जर जिले के छारा गांव निवासी एक किसान की सोमवार शाम पीजीआई रोहतक में इलाज के दौरान मौत हो गई। मंगलवार को गांव में किसानों ने सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। इस मौके पर किसान एकता जिंदाबाद और जय जवान, जय किसान के नारे भी लगाए गए।
जानकारी के अनुसार छारा गांव के किसान बिजेंद्र (57) ने करीब 55 दिन तक टीकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन में भाग लिया। किसानों के दिल्ली ट्रैक्टर मार्च से पहले वह बीमार पड़ गए। साथी किसानों और परिजनों ने उन्हें पीजीआई रोहतक में भर्ती करवाया था। जहां दो सप्ताह तक उनका इलाज चला।
छारा के निवासी युवा किसान अनिल ने बताया कि बिजेंद्र को ठंड लगने के कारण निमोनिया हो गया था। कई दिन तक वह वेंटिलेटर पर भी रहे और सोमवार शाम उनकी मौत हो गई। मंगलवार को गांव में ग्रामीणों ने सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया। उनको उनके दत्तक पुत्र मोनू ने मुखाग्नि दी।
किसान बिजेंद्र की अर्थी पर भारतीय किसान यूनियन का झंडा ओढ़ाया गया था। अंतिम संस्कार से पहले किसान नेताओं ने यह झंडा उतार कर बिजेंद्र के बड़े भाई महावीर को सौंपा। सैकड़ों किसानों ने बिजेंद्र को श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा में भारतीय किसान यूनियन के महासचिव डिंपी पहलवान, सुंदर पहलवान बामला, बबलू सरपंच, दलाल खाप-84 के प्रधान भूप सिंह दलाल, दलाल-12 के प्रधान मास्टर साहब सिंह, राजीव मास्टर, जितेंद्र राठी, बबला प्रधान रईया, बबलू ठेकेदार, राकेश व सुमित ठेकेदार मातन मौजूद रहे।