झज्जर। परिवार पहचान पत्र में गांव टांडाहेड़ी निवासी 6 साल के मिताष को 22 का और उसकी आय भी तीन लाख रुपये सालाना दिखाई है। इसे ठीक करवाने के लिए उसके दादा जिले सिंह कई माह से चक्कर काट रहे हैं। मामला सुर्खियों में आया तो मिताष की जन्मतिथि को ठीक कर दिया व परिवार पहचान पत्र को मर्ज करने के लिए आवेदन कर दिया है।
जिले सिंह ने बताया कि उसके बेटे जयप्रकाश की मृत्यु हो चुकी है। उसका पोता मिताष 6 साल का है लेकिन उसका परिवार पहचान पत्र अलग बना हुआ है। वह कई बार उसका परिवार पहचान पत्र अपने परिवार के दूसरे परिवार पहचान पत्र में मर्ज करवाने के लिए आ चुका है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है।
सीएससी केंद्र से भी आवेदन किया लेकिन समाधान नहीं हो रहा। खास बात है कि पोते के अलग बने परिवार पहचान पत्र में उसे 6 साल की बजाय 22 साल का दिखाया है जबकि आधार कार्ड में उसके पोते की जन्मतिथि 23 दिसंबर 2020 की है।
इसके अलावा परिवार पहचान पत्र में उसके पोते की वार्षिक आय भी एक लाख 80 हजार से तीन लाख दिखाई गई है जोकि गलत है। पोते की उम्र खेलने-कूदने और पढ़ने की है लेकिन परिवार पहचान पत्र में उसे 22 साल का युवा दिखाया है।
बताया कि पीपीपी में डाटा ठीक न होने के कारण उसके पोते का दाखिला भी स्कूल में नहीं हो पा रहा। वहां भी पहले इसे ठीक करवाने को बोला गया है। वह पिछले तीन साल लगातार चक्कर काट रहा है लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ।
वह लघु सचिवालय 202 नंबर कमरे में कर्मचारियों से मिला और समाधान की मांग की। इस पर वहां बैठे कर्मचारियों ने मिताष की जन्मतिथि को ठीक कर दिया व परिवार पहचान पत्र को मर्ज करने के लिए आवेदन कर दिया है।
जब परिवार पहचान पत्र शुरू हुए थे तो उस समय आधार से लिंक नहीं थे। इस कारण परिवार ने बच्चे की अलग फैमिली आईडी बनवाई होगी। उसके आधार पर राशन व अन्य लाभ भी ले लिए हैं। जैसे-जैसे परिवार पहचान पत्र आधार से लिंक होने के अलावा अपडेट हुआ तो उनको लाभ मिलने बंद हो गए। इसमें बच्चे की आयु व आय वैसे ही रह गई। अब बच्चे की आयु को 6 साल कर दिया है। उसकी फैमिली आईडी को परिवार की फैमिली आईडी में मर्ज करने के लिए आवेदन कर दिया है। वह भी एक-दो दिन में ठीक हो जाएगा। जहां तक आय का सवाल है तो मर्ज होने के बाद व्यवसाय में छात्र आने पर आय स्वयं ही खत्म हो जाएगी। जिला स्तर पर पीपीपी में केवल 6 माह का पुराना रिकाॅर्ड ही दिखता है। उससे पहले का पता नहीं लग पाता।
- हर्ष बैनीवाल, जिला प्रबंधक, क्रीड