अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। लोकसभा चुनावों के मद्देनजर केंद्र की भाजपा सरकार के द्वारा पेश किए गए बजट को व्यापारी, कर्मचारी वर्ग ने तो बेहतर बताया है लेकिन किसान बजट को लेकर कुछ खुश नहीं हैं। बजट में किसानों के लिए 6 हजार रुपये सालाना पेंशन का प्रावधान किया गया है, इसे किसान गैरजरूरी बताते हुए फसली भाव को महत्वपूर्ण बता रहे हैं। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को गोलमोल करने का आरोप भी किसानों द्वारा सरकार पर लगाया जा रहा है। व्यापारियों ने जीएसटी में कटौती को बेहतर कदम बताया है। वहीं सेवानिवृत्ति कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन नीति बहाल नहीं करने पर अफसोस जताया।
-जीएसटी में कटौती बेहतर कदम: अरोड़ा
काफी उत्पादों में जीएसटी की दरों में कमी की गई है, जो कि सराहनीय पहल है। वहीं पांच लाख रुपये तक की कमाई पर टैक्स में राहत देना बड़ा कदम है। व्यापारी वर्ग ने बजट से जो उम्मीदें लगा रखी थी, सरकार उस पर काफी हद तक खरी उतरी है। व्यापारी वर्ग के लिए जीएसटी ही सिरदर्द बनी हुई थी, जिसमें राहत देकर सरकार ने अच्छा कार्य किया है।
राकेश अरोड़ा, प्रधान, व्यापार मंडल
-टैक्स में राहत लेकिन पुरानी पेंशन नीति लागू हो: यादव
टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ाकर सरकार ने अच्छा कार्य किया है। लेकिन कर्मचारी पुरानी पेंशन नीति को बहाल करने की आशा लगाए बैठे थे, जिसे सरकार ने धूमिल किया है। एक कर्मचारी अपना पूरा जीवन सरकारी सेवा में लगा देता है लेकिन जब सेवानिवृत्त होता है तो उसे पेंशन भी नहीं मिलेगी। वृद्धावस्था में उसके लिए पेंशन ही सहारा होती है, जिसे सरकार को लागू करना चाहिए था।
देवेंद्र यादव, सचिव, रिटायर्ड कर्मचारी संघ।
मध्यम वर्ग का रखा ध्यान: सुदर्शन
केंद्र सरकार की तरफ से पांच लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त करने से कर्मचारियों और मध्यम वर्ग के लोगों को काफी फायदा होगा। पहले जहां ढाई लाख रुपये से अधिक की राशि पर टैक्स देना पड़ता था। अब इसे दोगुना कर दिया गया है। स्लैब में बदलाव कर सरकार ने लोगों को राहत प्रदान की है।
सुदर्शन कुमार, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, बहु।
कर्मचारी वर्ग को मिलेगा फायदा : वीरेंद्र
केंद्रीय वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने वर्तमान सरकार का अंतरिम बजट पेश किया। इसमें कर्मचारी वर्ग को टैक्स को लेकर राहत प्रदान की गई है। करीब 42 हजार रुपये तक का मासिक वेतन लेने वाले कर्मचारियों को अब आयकर नहीं देना पड़ेगा। इससे हर कर्मचारी को फायदा होगा।
वीरेंद्र गहलावत, शिक्षक, निवासी सेक्टर-6, झज्जर।
पेंशन नहीं, मार्केट व भाव की जरूरत: डागर
वर्तमान सरकार ने आने वाले वित्तवर्ष के लिए अपना अंतरिम बजट पेश करते समय किसानों के लिए 6 हजार रुपये पांच एकड़ तक की भूमि वाले किसानों के पेेंशन का प्रावधान तो किया है। लेकिन किसान को इससे कोई खास फायदा नहीं वाला है। सरकार को किसान की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उसकी फसल का पूरा मूल्य निर्धारित करने की योजना को मंजूरी देनी चाहिए थी। आज किसान कर्ज में डूबा हुआ है। उस समस्या को लेकर प्रावधान करना चाहिए था। किसान का उसके उत्पाद बेचने के लिए मार्केट चाहिए ताकि वे अपने उत्पाद आसानी से बेच सके।
भीम सिंह डागर, संयोजक कुदरती खेती किसान समूह, मातनहेल।
तेल कीमतों पर नियंत्रण को नहीं किया प्रावधान: सज्जन
केंद्र सरकार की ओर से जो अंतरिम बजट पेश किया गया है। उसमें आमजन को कुछ राहत प्रदान करने का कार्य तो किया गया है। लेकिन बढ़ती तेल की कीमतों पर रोक लगाने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। जो महंगाई को बढ़ावा देती हैं। इसे रोकने के लिए सरकार को प्रावधान करना चाहिए था। इससे बढ़ती मंगाई पर रोक लगती।
सज्जन सिंह, किसान एवं पूर्व सरपंच बहु।