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कैंसर इंस्टीट्यूट में 30 बेड की आपाकालीन सेवा, पहले दिन तीन रोड भर्ती

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मनोज कौशिक
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बादली। दिल्ली के एम्स से करीब 50 किलोमीटर दूर बादली उपमंडल के बाढ़सा गांव में कैंसर संस्थान की आपातकालीन सेवाओं का ट्रायल के तौर पर शुभारंभ हो गया है। शुभारंभ के साथ ही रोगियों को भर्ती होने की सुविधाएं भी मिल गई। सोमवार को पहले दिन ही तीन रोगियों को दाखिल किया गया। बाढ़सा स्थित निर्माणाधीन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान का सोमवार को हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (मेडिकल) अमित झा व एम्स निदेशक प्रो. रणदीप गुलेरिया ने डीसी सोनल गोयल के साथ दौरा किया। साथ ही बैठक कर संबंधित विभागीय अधिकारियों व एम्स प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के शुभारंभ कार्यक्रम को लेकर भी हरियाणा सरकार-एम्स अधिकारियों ने विचार-विमर्श किया। बैठक में संस्थान के अब तक हुए विकास कार्य का पूरा प्रारूप रखा गया और जल्द ही देशवासियों को इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के सुचारु रूप से स्वास्थ्य सेवा मिले इसके लिए योजनागत तरीके से कदम उठाने की रूपरेखा तैयार की गई।
अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित झा ने कहा कि हरियाणा सरकार स्वास्थ्य सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों में एम्स को भरपूर सहयोग दे रही है। उन्होंने बताया कि जल्द से जल्द कैंसर रोगियों को देश के सबसे बड़े इस कैंसर संस्थान का लाभ स्वास्थ्य सेवा के रूप में मिले इसके लिए सरकार की ओर से प्रशासनिक स्तर पर पूरी तैयारी की गई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश के मेडिकल कॉलेज व जिले के नागरिक अस्पताल में आने वाले कैंसर पीड़ित रोगियों को अब राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनआईसी) में रेफर सुविधा भी रहेगी ताकि कैंसर रोगी को तत्परता से राहत पहुंचाई जा सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सोच के अनुरूप लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए सकारात्मक कदम बढ़ाए जा रहे हैं और यह संस्थान इस दिशा में अति महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। एम्स निदेशक ने बताया कि बाढ़सा क्षेत्र में करीब 2035 करोड़ की लागत से देश के सबसे बड़े 710 बेड के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के बनने से न केवल राजधानी क्षेत्र बल्कि पूरे भारत के लिए स्वास्थ्य हब के रूप में एक नई पहचान कायम करेगा। उन्होंने बताया कि एम्स दिल्ली से एम्स बाढ़सा की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के एचओडी प्रो. जेके रथ, पीजीआई रोहतक के वाइस चांसलर डॉ. ओपी कालरा, एम्स प्रशासन से डॉ. एंजल सिंह, एसडीएम बादली त्रिलोकचंद, बिजली निगम के एसई संदीप जैन, जनस्वास्थ्य विभाग के एसई जगबीर मलिक, सिंचाई विभाग के एसई आरएस सौलखा और रोडवेज जीएम महताब सिंह खर्ब सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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जिला प्रशासन करेगा सहयोग
उपायुक्त सोनल गोयल ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से निर्माण एजेंसी को प्रदत्त होने वाली सभी आवश्यक सुविधाओं में पूरा सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बाढ़सा एम्स संस्थान की सुविधा के लिए बाढ़सा क्षेत्र में नया बस स्टैंड करीब 3.16 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। साथ ही बिजली, पानी सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं भी विभागीय स्तर पर प्रदत्त की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग के माध्यम से संस्थान परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को भी सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही बाढ़सा एनसीआई तक लोगों के आवागमन के लिए बहादुरगढ़ व झज्जर से बस सेवा भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि लोगों को आवागमन में किसी प्रकार से परेशानी न हो।

एक दशक तक चला निर्माण कार्य
एक दशक पहले 2008-09 में शुरू हुए भूमि पूजन कार्य के बाद आखिरकार अब कैंसर संस्थान में आपातकालीन सेवाओं का श्रीगणेश शुरू हो गया है। फरवरी 2009 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ अंबुमणि रामदास बाढ़सा पहुंचे थे और एम्स-2 को बाढ़सा में बनाने की सहमति दी। तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने एम्स-2 की आउटरीच ओपीडी का शुभारंभ किया। 2009 में केंद्र सरकार से मंजूरी दिलाने के बाद 3 जनवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा शिलान्यास के बाद राष्ट्रीय कैंसर संस्थान पर काम चालू हुआ। 2017 के अक्तूबर माह में प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया जबकि दिसंबर 2018 में ट्रायल के तौर पर कैंसर संस्थान में ओपीडी शुरू हुई।

संस्थान में मिलेंगी पेपर लेस सुविधाएं
रोगियों को पूरी तरह से पेपर लेस किया जाएगा। दिल्ली के एम्स और बाढ़सा के कैंसर संस्थान के परिसरों के बीच की दूरी कम करने के लिए रोगियों को यूनीक आईडी मिलेगी। मरीजों को एक यूनीक आईडी दी जाएगी ताकि रोगी और चिकित्सकों के बीच इलाज को लेकर सामंजस्य बना रहे। रोगियों की सुविधा के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा भी खोली गई है ताकि कैसलेस सुविधा रोगियों को मिल सके। रोगी के रजिस्ट्रेशन नंबर में कैश जमा हो जाएगा। कैंसर ओपीडी में पांच रोगी इलाज कराने पहुंचे, जिनमें से तीन रोगियों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया। जबकि दो मरीजों का प्राथमिक उपचार शुरू किया गया है।

बोले तीमारदार
कैंसर रोगियों के साथ अस्पताल पहुंचे तीमारदारों में सोनीपत जिले के प्रदीप ने बताया कि उनके पिता धर्मसिंह का इलाज पहले फरीदाबाद में चल रहा था। सोनीपत से फरीदाबाद जाने में काफी समय और अधिक खर्च उठाना पड़ता था। वहीं दादरी जिले के मांगेराम ने बताया कि रोहतक के पीजीआई में अपने पिता दरियाव सिंह का इलाज करा रहे थे मगर अब बाढ़सा कैंसर रोगियों के संस्थान स्थापित होने की जानकारी के बाद यहां आए हैं।

कैंसर से लड़ने की जरूरत, डरने की नहीं : डॉ. गुलेरिया
कैंसर जैसी बीमारी का शब्द सुनते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं और शरीर कांपने लगता है। कैंसर सचमुच उतना खतरनाक ही है जितना उसे समझ जाता है। इस भयावह बीमारी का बड़ा हौवा बन चुका है जबकि कैंसर से डरने की बजाए लड़ने की जरूरत है। यह कहना है कि बाढ़सा में स्थापित हुए कैंसर संस्थान के निदेशक रणदीप गुलेरिया का। डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि कैंसर रोग से बहुत ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है। कैंसर के 90 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों का फर्स्ट स्टेज में इलाज हो सकता है जबकि सेकेंड स्टेज में यह अनुपात करीब 70 प्रतिशत है, तीसरे चरण में 40 प्रतिशत और चौथे चरण में 10 प्रतिशत से भी कम माना जाता है।
डॉ. एंजेल के अनुसार आजकल कई तरह के कैंसर को गंभीर लेकिन काबू में आने लायक बीमारी माना जाता है जिन्हें कैंसर के अलावा किसी भी दूसरे गंभीर रोगों की तरह दवाओं से कई साल तक काबू में रखा जा सकता है। लेकिन दुख की बात यह है कि शुरू में ही बीमारी का निदान करा लेने के सहज लाभ के बावजूद हमारे देश में 80 प्रतिशत से अधिक कैंसर रोगी थर्ड और फोर्थ स्टेज में इलाज के लिए आते हैं और इस समय तक अधिकतर मामले लाइलाज हो जाते हैं। यही वजह है कि यह भ्रांति फैलती है कि कैंसर लाइलाज है जबकि कैंसर से लडने की जरूरत है न कि डरने की।

कैंसर के कारण
कैंसर रोग विशेषज्ञों के अनुसार एक तिहाई से ज्यादा कैंसर तंबाकू या उससे बने उत्पादों के सेवन की देन हैं जबकि एक तिहाई खान-पान और रहन-सहन या दूसरे सामाजिक कारकों से जुड़े हैं। भारत में कैंसर की वजह गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, कम उम्र में विवाह, बार-बार गर्भवती होना, गंदगी और सेहत को लेकर अनदेखी जैसे कारण भी प्रमुख हैं। यही नहीं चिकित्सक सुविधाओं की भारी कमी के चलते भी कैंसर जन्म लेता है।

भ्रांतियों से बचे: एचओडी
राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के एचओडी प्रोफेसर जेके रथ ने रोगियों और तीमारदारों से भ्रांतियों से बचने की सलाह देते हुए कहा कि अक्सर भ्रांति फैलाई जाती है कि कैंसर छूत का रोग है। कैंसर रोग के बारे में जान लेना जरूरी है कि कैंसर संक्रामक रोग नहीं है और कैंसर रोगी के साथ खाना खाने, सोने या पीने से यह बीमारी नहीं फैलती। कई लोग इसे खानदानी बीमारी मानते हैं लेकिन कुछ कैंसर रोग ऐसे हैं जो परिवार की हिस्ट्री, खान-पान की आदतों या अन्य कारणों से विभिन्न सदस्यों में नजर आ सकते हैं। इनमें कोलन कैंसर है जो खान-पान की आदतों से होता है जबकि ब्रेस्ट कैंसर मां और बेटी में आनुवंशिक कारणों से हो सकता है। इसके अतिरिक्त सिर्फ 5 फीसदी कैंसर जनेटिक होते हैं।
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सरकारी लाभ ले
बाढ़सा एम्स प्रशासन की ओर से डॉ. एंजेल ने बताया कि कैंसर रोगी और उनके परिसर को रेलवे रियायत कैंसर रोगी रेलवे में सफर करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है। उनका किराया मुफ्त है। परिसर या सहायक को द्वितीय श्रेणी के किराए का केवल 25 प्रतिशत भुगतान करना पड़ता है। यह रियायत निकटतम गृहनगर स्टेशन से कैंसर कैंसर संस्थान की यात्रा और वापस आने के लिए लागू है। कैंसर रोगी को हवाईयात्रा में भी रियायत मिलती है।
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